मध्य प्रदेश

Kanha टाइगर रिज़र्व में 500+ कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू

Kavita2
24 May 2026 10:28 AM IST
Kanha टाइगर रिज़र्व में 500+ कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद वन विभाग और संबंधित टीमों ने बड़ा कदम उठाया है। रिज़र्व के आसपास बसे गांवों में रहने वाले कुत्तों का बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

जानकारी के अनुसार, रिज़र्व के दो किलोमीटर के दायरे में स्थित करीब 50 गांवों में यह अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 500 से अधिक कुत्तों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि महीने के अंत तक सभी लगभग 900 कुत्तों का टीकाकरण पूरा कर लिया जाए।

कान्हा टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि इस अभियान के लिए तीन पशु चिकित्सा टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं। ये टीमें रोजाना अलग-अलग गांवों में जाकर कुत्तों का टीकाकरण कर रही हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की भी जांच कर रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, कुत्तों को कैनाइन डिस्टेंपर और रेबीज़ जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते इन दोनों वायरस के संभावित वाहक हो सकते हैं, जिससे वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

वन विभाग ने बताया कि कई बार कुत्ते जंगल में जाकर बाघों के शिकार का मांस खाते हैं, जिससे वे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संपर्क में आ सकते हैं। इसके बाद यह संक्रमण वन्यजीवों, खासकर बाघों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने यह भी जानकारी दी कि कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए स्टरलाइज़ेशन (नसबंदी) अभियान भी शुरू किया जाएगा। यह अभियान जून के पहले सप्ताह में शुरू होने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में कुत्तों की संख्या में नियंत्रण आएगा और जंगल के पारिस्थितिक तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

वन विभाग के अनुसार, कान्हा टाइगर रिज़र्व में वर्तमान में 130 से अधिक बाघ अलग-अलग बीट और रेंज में सक्रिय रूप से विचरण कर रहे हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम प्रयास है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। स्थानीय गांवों में भी लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है ताकि वे अपने पालतू जानवरों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और वन्यजीवों के संपर्क को सीमित रखें।

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