मध्य प्रदेश

Ujjain : भस्म से अभिषेक, चंद्र-त्रिपुंड से सजे महाकाल

Uma Verma
27 March 2025 10:04 AM IST
Ujjain : भस्म से अभिषेक, चंद्र-त्रिपुंड से सजे महाकाल
x

उज्जैन | उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भक्तों को एक बार फिर अद्भुत और दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बाबा महाकाल को विशेष श्रृंगार के साथ चंद्र और त्रिपुंड से अलंकृत किया गया, जिससे मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया। हर दिन की तरह प्रातःकालीन भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को विशेष अनुष्ठानों के साथ भस्म रमाई गई, जिसके बाद भक्तों ने उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

हर दिन तड़के 3:30 बजे होने वाली भस्म आरती उज्जैन महाकाल मंदिर की सबसे विशेष पूजा मानी जाती है। इस दौरान महाकाल को ताजे जल, दूध, घी, शहद और पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद भभूत (भस्म) से उनका अभिषेक किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आरती के बाद मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड सजाकर भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया गया।

भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के बीच बाबा महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान महाकाल मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।

त्रिपुंड और चंद्र का विशेष महत्व

शिव भक्तों के लिए महाकाल का त्रिपुंड और चंद्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है। त्रिपुंड शिव के तीन गुणों- सत्व, रज और तम का प्रतीक माना जाता है, जबकि चंद्रमा उनके सौम्य और शांत स्वभाव को दर्शाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र को शिव के मस्तक पर स्थान इसलिए मिला, क्योंकि उन्होंने उसे गणना, शीतलता और समय का कारक बनाया।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों के अनुसार, जब भगवान महाकाल को त्रिपुंड और चंद्र के साथ सजाया जाता है, तो यह उनके रौद्र और सौम्य दोनों रूपों का संगम प्रस्तुत करता है।

श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की भव्यता

भस्म आरती और विशेष श्रृंगार के चलते उज्जैन का महाकाल मंदिर एक बार फिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और महाकाल की भक्ति में लीन हो जाते हैं। मंदिर के महंत के अनुसार, श्रद्धालु जब भस्म आरती में शामिल होते हैं, तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान की तैयारी

मंदिर प्रशासन के अनुसार, आगामी सावन और महाशिवरात्रि के लिए भव्य आयोजन की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस दौरान महाकाल की सवारी, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को और सुव्यवस्थित बनाने का निर्णय लिया है।

बाबा महाकाल के अलौकिक श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन के लिए हर दिन हजारों भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से महाकाल का दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।


Next Story