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उज्जैन | उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आज प्रातः भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का अलौकिक रूप देखने को मिला। भगवान महाकाल को मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। सैकड़ों श्रद्धालु इस भव्य आरती में शामिल हुए और हर-हर महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
त्रिपुंड और त्रिशूल के विशेष श्रृंगार का महत्व
भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उनके मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का प्रतीक अंकित किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रिपुंड शिव के तीन प्रमुख स्वरूपों - सृष्टि, स्थिति और संहार का प्रतीक है। वहीं, त्रिशूल शिव की शक्ति और त्रिगुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतिनिधित्व करता है। भक्तों का मानना है कि इस दिव्य रूप में बाबा महाकाल के दर्शन से समस्त कष्टों का निवारण होता है।
भस्म आरती में उमड़ी भक्तों की भीड़
आज सुबह मंदिर के गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान के साथ भस्म आरती की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर अपने कष्टों से मुक्ति की कामना की। आरती के समय पूरा परिसर शिव मंत्रों और भजनों से गूंज उठा।
धार्मिक आस्था और परंपरा का संगम
महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती की परंपरा निभाई जाती है। यह आरती महादेव की अग्नि तत्व से जुड़ी शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि इस आरती के दर्शन मात्र से ही जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।
श्रद्धालुओं में भक्ति का उत्साह
देशभर से श्रद्धालु महाकाल के भव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन करने पहुंचे। कई भक्तों ने सोशल मीडिया पर इस दिव्य आरती के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं। भक्तों का कहना है कि बाबा महाकाल का यह अलौकिक स्वरूप उनके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लाता है।
महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन की तैयारियां
मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं कीं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन करवाए गए। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भस्म आरती के लिए पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा दी गई थी, जिससे ज्यादा से ज्यादा भक्त इस आध्यात्मिक अनुभव का हिस्सा बन सकें।
शिवभक्तों के लिए विशेष अवसर
महाकाल की भस्म आरती शिवभक्तों के लिए एक आध्यात्मिक पर्व से कम नहीं होती। आज के विशेष श्रृंगार ने भक्तों के बीच उत्साह और भक्ति की लहर पैदा कर दी। बाबा महाकाल के त्रिपुंड और त्रिशूल से सजे स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालु खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं।





