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मध्य प्रदेश
टपरी में घुसे दो चीते, पति-पत्नी ने भागकर बचाई जान
Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 12:59 PM IST

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श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क से निकलकर रिहायशी इलाके में पहुंचे दो चीतों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार सुबह करीब पांच बजे बमोरी गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब दो चीते एक ग्रामीण के घर की टपरी में घुस गए। वहां बंधे दो बछड़ों पर चीतों ने हमला कर दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। सुबह-सुबह हुई इस घटना से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। खास बात यह है कि जिस स्थान पर चीते पहुंचे, वहां एक दंपति भी मौजूद था। ऐसे में अचानक जंगली जानवरों की मौजूदगी से पति-पत्नी की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया। घटना के बाद गांव में वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सुबह पांच बजे गांव में घुसे दो चीते
जानकारी के अनुसार, श्योपुर जिले के बमोरी गांव में रविवार सुबह करीब पांच बजे दो चीते रिहायशी क्षेत्र में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि दोनों चीते कूनो नेशनल पार्क की रेंज से निकलकर गांव की ओर आए थे।सुबह का समय होने के कारण अधिकांश ग्रामीण अपने घरों में थे। इसी दौरान चीते एक ग्रामीण के घर के पास बनी टपरी में घुस गए, जहां दो बछड़े बंधे हुए थे।चीतों ने अचानक दोनों बछड़ों पर हमला कर दिया। हमले में बछड़ों की मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आते ही आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।गांव में एक साथ दो चीतों के पहुंचने से लोगों में भय का माहौल बन गया है।
टपरी में बंधे दो बछड़ों को बनाया शिकार
ग्रामीण के घर के पास बनी टपरी में दो बछड़े बंधे हुए थे। इसी स्थान पर दोनों चीते पहुंचे और पशुओं पर हमला कर दिया।बंधे होने के कारण बछड़ों के लिए वहां से निकल पाना मुश्किल था। हमले में दोनों पशुओं की जान चली गई।ग्रामीण इलाकों में पशुपालन लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन होता है। ऐसे में पालतू पशुओं की मौत से संबंधित परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।हालांकि, मृत बछड़ों के मालिक का नाम और नुकसान का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।इस घटना ने ग्रामीणों के सामने अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
पति-पत्नी की जान पर भी मंडराया खतरा
बताया जा रहा है कि जिस ग्रामीण के घर की टपरी में चीते घुसे, वहां पति-पत्नी भी मौजूद थे। अचानक दो जंगली जानवरों के पहुंचने से उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई।गनीमत रही कि उपलब्ध जानकारी में दंपति पर किसी हमले या उनके घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।हालांकि, चीतों के घर के इतने करीब पहुंचने से ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।घटना ने यह भी दिखाया है कि वन्यजीवों की रिहायशी इलाकों में आवाजाही होने पर इंसानों और पालतू पशुओं के बीच टकराव की आशंका बढ़ सकती है।
गांव में दहशत, पशुपालकों की बढ़ी चिंता
बमोरी गांव में दो चीतों के पहुंचने और बछड़ों की मौत की घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।विशेष रूप से वे परिवार चिंतित हैं, जिनके घरों के आसपास गाय, भैंस, बछड़े और अन्य पालतू पशु बंधे रहते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार अपने पशुओं को घर के पास बने बाड़ों या टपरियों में रखते हैं। ऐसे स्थानों पर जंगली जानवरों के पहुंचने से पशुओं की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।अब ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वन्यजीव दोबारा गांव की ओर आते हैं, तो उनसे अपने परिवार और मवेशियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
कूनो नेशनल पार्क से बाहर बढ़ रही चीतों की आवाजाही
श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क देश की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापना परियोजना का प्रमुख केंद्र है।भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को दोबारा बसाने के उद्देश्य से इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को लाकर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया।चीतों के पुनर्वास के साथ उनकी गतिविधियों और प्राकृतिक व्यवहार की निगरानी भी वन्यजीव प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।चीते खुले क्षेत्रों में लंबी दूरी तक विचरण कर सकते हैं। ऐसे में पार्क की सीमाओं से बाहर उनकी आवाजाही वन्यजीव प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण विषय है।हालांकि, बमोरी गांव में पहुंचे दोनों चीतों की पहचान और उनकी निगरानी से संबंधित आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
वन्यजीव और इंसानों के बीच टकराव की चुनौती
कूनो नेशनल पार्क के आसपास बसे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।जब जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचते हैं, तो पालतू पशुओं पर हमले और इंसानों के साथ अचानक आमना-सामना होने की आशंका रहती है।विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।इसके लिए जानवरों की गतिविधियों की निगरानी, ग्रामीणों को समय पर सूचना और संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतने जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।चीतों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को भी वन विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।
ग्रामीणों के लिए जरूरी है सतर्कताबमोरी गांव की घटना के बाद वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता सामने आई है।
विशेष रूप से सुबह और शाम के समय मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में रखना उपयोगी हो सकता है।यदि किसी गांव में चीता या अन्य जंगली जानवर दिखाई देता है, तो ग्रामीणों को उसके पास जाने, उसे घेरने या भगाने का प्रयास करने से बचना चाहिए।ऐसी स्थिति में वन विभाग को सूचना देना और प्रशिक्षित कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित उपाय है।वन्यजीवों के साथ सीधे टकराव से बचना इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
घटना के बाद वन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
बमोरी गांव में दो बछड़ों की मौत के बाद वन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।अब यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि गांव में पहुंचे चीते कौन थे और घटना के बाद वे किस दिशा में गए।इसके अलावा प्रभावित पशुपालक को नियमानुसार सहायता या मुआवजा मिलने की संभावना भी संबंधित विभागीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।हालांकि, घटना के बाद वन विभाग की ओर से की गई किसी विशेष कार्रवाई, चीतों की लोकेशन या मुआवजे की घोषणा की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
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