मध्य प्रदेश

जलाभिषेक की बारी को लेकर भिड़े डाक कांवड़ियों के दो गुट, मुरैना के मंदिर में हुआ विवाद

Kavita2
12 Aug 2026 5:28 PM IST
जलाभिषेक की बारी को लेकर भिड़े डाक कांवड़ियों के दो गुट, मुरैना के मंदिर में हुआ विवाद
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मध्य प्रदेश : मुरैना जिले में सावन के पवित्र महीने के दौरान प्रसिद्ध तेल्हरी वाले भोले बाबा मंदिर में डाक कांवड़ियों के दो गुटों के बीच विवाद हो गया। मंदिर में पवित्र गंगा जल से जलाभिषेक पहले कौन करेगा, इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला झगड़े तक पहुंच गया। घटना रामपुर कलां इलाके में स्थित मंदिर की बताई जा रही है।

सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के जरिए विभिन्न शिव मंदिरों में पहुंचते हैं। इसी क्रम में डाक कांवड़िए भी निर्धारित मार्ग से यात्रा करते हुए शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। बताया जा रहा है कि इसी यात्रा के दौरान ‘रुद्र घन खालसा’ से जुड़े कांवड़ियों का एक समूह स्वयंभू शिवलिंग मंदिर पहुंचा था। यहां जलाभिषेक की बारी को लेकर दूसरे गुट के साथ विवाद हो गया।

पहले जल चढ़ाने को लेकर हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि दोनों गुटों के श्रद्धालु मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे थे। सावन के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जल चढ़ाने के लिए कतार और क्रम का पालन किया जाता है। इसी दौरान पहले जलाभिषेक करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।

शुरुआत में मामला बातचीत और कहासुनी तक सीमित था, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद दोनों गुटों के बीच झगड़ा हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई।

सावन में मंदिरों में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में लोग कांवड़ लेकर शिवालयों तक पहुंचते हैं और गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

डाक कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु यात्रा को निर्धारित समय में पूरा करने और पवित्र जल को शिवलिंग पर अर्पित करने को धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में कई प्रमुख मंदिरों में सावन के दौरान भारी भीड़ रहती है। मुरैना के तेल्हरी वाले भोले बाबा मंदिर में भी इन दिनों श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी हुई है।

रुद्र घन खालसा गुट के पहुंचने पर बढ़ी हलचल

घटना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ‘रुद्र घन खालसा’ कांवड़ियों का एक गुट स्वयंभू शिवलिंग मंदिर पहुंचा था। इसी दौरान दूसरे गुट के श्रद्धालु भी जलाभिषेक के लिए मौजूद थे। मंदिर में पहले कौन जल चढ़ाएगा, इसको लेकर दोनों पक्षों में बहस हो गई।

धार्मिक स्थल पर विवाद होने के बाद वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं में भी हलचल मच गई। लोग मामले को शांत कराने की कोशिश करते नजर आए। हालांकि, विवाद किस स्तर तक पहुंचा और उसमें कितने लोग शामिल थे, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

धार्मिक स्थल पर विवाद से चिंता

मंदिर में जलाभिषेक को लेकर हुए विवाद ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।

विशेष रूप से डाक कांवड़ यात्राओं के दौरान श्रद्धालु समूहों में मंदिरों तक पहुंचते हैं। कई बार एक ही समय पर अलग-अलग कांवड़ दलों के पहुंचने से मंदिरों में भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में जलाभिषेक के लिए क्रम तय करने और उसका पालन कराने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

व्यवस्था और सुरक्षा पर जोर जरूरी

मंदिर में हुए विवाद के बाद यह आवश्यकता महसूस की जा रही है कि सावन के शेष दिनों में मंदिर परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाने, कांवड़ियों के समूहों के लिए समय और मार्ग निर्धारित करने तथा संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात करने से ऐसे विवादों को रोका जा सकता है।

श्रद्धालुओं से भी संयम बरतने और धार्मिक स्थलों पर निर्धारित व्यवस्था का पालन करने की अपील की जाती है। जलाभिषेक को लेकर होने वाली छोटी-सी कहासुनी भी बड़ी घटना का रूप ले सकती है, इसलिए सभी पक्षों को धार्मिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने की जरूरत होती है।

पुलिस और प्रशासन की नजर

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन की सक्रियता भी महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा सकती है और विवाद में शामिल लोगों की पहचान के आधार पर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ के जरिए विवाद की शुरुआत और उसके बढ़ने की वजह का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है।

फिलहाल इस घटना ने सावन के दौरान धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा और अनुशासन की जरूरत को सामने ला दिया है। तेल्हरी वाले भोले बाबा मंदिर में डाक कांवड़ियों के दो गुटों के बीच जलाभिषेक की बारी को लेकर हुआ विवाद इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक आयोजनों में छोटी-सी बात भी तनाव का कारण बन सकती है।

सावन में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मुरैना के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार पहुंच रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही होगी कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी बनी रहे।

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