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श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के बमौरी गांव में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब दो चीते मवेशियों के बाड़े में घुस आए। चीतों ने बाड़े में बंधे दो बछड़ों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। घटना के समय बाड़े के पास ही चरवाहा सोमला वीर और उनकी पत्नी चारपाई पर सो रहे थे। जानवरों की आवाज सुनकर उनकी नींद खुली तो उन्होंने बाड़े के अंदर दो चीतों को देखा। अचानक सामने आए चीतों को देखकर दंपती घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग गए।
यह घटना कूनो नेशनल पार्क के नजदीक कराहल इलाके में हुई। गांव में चीतों के बाड़े तक पहुंचने और मवेशियों पर हमला करने की घटना के बाद ग्रामीणों के बीच चिंता बढ़ गई है। लोगों को आशंका है कि वन्यजीवों की आवाजाही अब गांवों और इंसानी बस्तियों के नजदीक तक हो रही है।
रात में मवेशियों के बाड़े में घुसे चीते
मिली जानकारी के अनुसार, बमौरी गांव निवासी चरवाहा सोमला वीर अपनी पत्नी के साथ मवेशियों के बाड़े के पास चारपाई पर सो रहे थे। रात के समय अचानक मवेशियों के डरने और आवाज करने की आहट सुनाई दी। इससे दंपती की नींद खुल गई।
जब उन्होंने बाड़े की ओर देखा तो अंदर दो चीते मौजूद थे। अचानक इस तरह जंगली जानवरों को अपने मवेशियों के बीच देखकर वे हैरान रह गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों ने वहां रुकना उचित नहीं समझा। हमले की आशंका के चलते वे तत्काल अपनी जान बचाकर वहां से दूर भाग गए।
दंपती के लिए यह घटना बेहद डरावनी थी, क्योंकि चीते उनके सोने की जगह के बिल्कुल पास मवेशियों के बाड़े में पहुंच चुके थे। यदि उनकी नजर समय पर चीतों पर नहीं पड़ती या वे वहां मौजूद रहते, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चरवाहे और उनकी पत्नी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है।
सुबह करीब पांच बजे हुई घटना
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना रविवार सुबह करीब पांच बजे हुई। बमौरी गांव में सोमला वीर सिंह की टपरी में मवेशी बंधे हुए थे। इसी दौरान दो चीते वहां पहुंच गए और बछड़ों पर हमला कर दिया। मवेशियों की हलचल और आवाज सुनकर पास में सो रहे दंपती की नींद खुली। चीतों को सामने देखकर दोनों घबरा गए और तुरंत वहां से भाग निकले।
दोनों बछड़ों की मौत से पशुपालक को नुकसान हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशी कई परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन होते हैं। ऐसे में पालतू पशुओं पर वन्यजीवों के हमले से आर्थिक नुकसान के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती है।
आसपास के गांवों में भी चिंता का माहौल
घटना के बाद बमौरी और आसपास के गांवों में चीतों की मौजूदगी को लेकर लोगों में डर बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जंगली जानवर बस्तियों और घरों के नजदीक पहुंचते रहे, तो भविष्य में इंसानों के सामने भी खतरा पैदा हो सकता है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद ग्रामीणों ने चीतों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और इलाके में वन विभाग की गश्त तेज करने की मांग उठाई है। प्रभावित पशुपालक को हुए नुकसान के बदले मुआवजा देने की मांग भी सामने आई है।
ग्रामीणों के लिए एक बड़ी चिंता यह है कि मवेशियों को रखने वाले बाड़े और सोने की जगह कई बार एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं। ऐसे में रात के दौरान वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इस घटना में भी दंपती चीतों के पहुंचने तक सो रहे थे और जानवरों की आवाज सुनने के बाद ही उन्हें खतरे का पता चला।
कूनो नेशनल पार्क के आसपास मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती
श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क देश में चीता संरक्षण कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र है। पार्क के आसपास गांव और कृषि क्षेत्र होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही तथा स्थानीय लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
बमौरी की घटना ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान खींचा है कि संरक्षित क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और उनके मवेशियों की सुरक्षा के लिए निगरानी तथा समय पर सूचना की व्यवस्था कितनी जरूरी है। वन्यजीवों का गांव के नजदीक पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बन सकता है, खासकर जब वे सीधे मवेशियों के बाड़े में प्रवेश कर जाएं।
ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे जंगली जानवरों के करीब जाने या उन्हें खुद भगाने की कोशिश न करें। वन्यजीव दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखना और वन विभाग को जानकारी देना अधिक सुरक्षित कदम है।
निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी नजर
बमौरी गांव में दो चीतों के हमले में दो बछड़ों की मौत के बाद अब क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि बस्तियों के आसपास चीतों की आवाजाही पर नजर रखी जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल इस घटना में चरवाहा सोमला वीर सिंह और उनकी पत्नी सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके दो बछड़ों की जान चली गई। घटना से ग्रामीणों में चिंता बढ़ी है और वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों तथा उनके पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत फिर सामने आई है।





