मध्य प्रदेश

दूध की जांच के लिए TRIPLE T अभियान

Kavita2
2 Sept 2026 9:46 AM IST
दूध की जांच के लिए TRIPLE T अभियान
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इंदौर। शहर में बिकने वाले दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने नया अभियान शुरू किया है। विभाग ने ‘TRIPLE T यानी ट्रस्ट थ्रू टेस्टिंग’ अभियान के तहत दूध की तेजी से जांच शुरू की है। अभियान का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी करने के साथ खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाना है।

अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें दूध विक्रेताओं, डेयरी दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों तक पहुंच रही हैं। दूध और खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर ही प्रारंभिक जांच के लिए ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ वाहन और ‘रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे दूध की गुणवत्ता से जुड़ी संभावित समस्याओं की तेजी से पहचान करने में मदद मिलेगी।

दूध रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में शामिल है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में दूध की गुणवत्ता और शुद्धता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बाजार में उपलब्ध दूध की जांच को प्राथमिकता दी है।

मौके पर दूध की जांच

TRIPLE T अभियान की प्रमुख विशेषता यह है कि खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक जांच मौके पर ही की जा सकती है। इसके लिए विभाग ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ का इस्तेमाल कर रहा है। यह एक मोबाइल खाद्य परीक्षण व्यवस्था है जिसके जरिए अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच की जा सकती है।

इसके साथ ही दूध की जांच के लिए रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे गुणवत्ता से जुड़े कुछ मानकों की तेजी से जांच संभव होती है। यदि जांच के दौरान किसी नमूने में गड़बड़ी की आशंका सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई और विस्तृत परीक्षण किया जा सकता है।

इस अभियान का उद्देश्य केवल अनियमितता पकड़ना नहीं बल्कि विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को जागरूक करना भी है। विभाग की टीमें बाजार में जाकर लोगों को खाद्य सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के महत्व के बारे में जानकारी दे रही हैं।

दूध विक्रेताओं और डेयरी दुकानों की जांच

खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीमों ने अभियान के तहत दूध बेचने वाले विक्रेताओं और डेयरी की दुकानों का दौरा किया। इस दौरान दूध की गुणवत्ता की जांच के साथ वहां मौजूद लोगों को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया गया।

दूध की आपूर्ति कई स्तरों से होकर ग्राहकों तक पहुंचती है। उत्पादन के बाद परिवहन, भंडारण और बिक्री के दौरान उचित तापमान तथा साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी होता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही से दूध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि अभियान में केवल दूध के नमूने की जांच ही नहीं बल्कि बिक्री और भंडारण से जुड़ी स्थितियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

टीमें अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों तक भी पहुंच रही हैं। इसका उद्देश्य खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान करना और दुकानदारों को नियमों के पालन के लिए जागरूक करना है।

उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने पर जोर

‘ट्रस्ट थ्रू टेस्टिंग’ नाम से ही अभियान का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट होता है। विभाग परीक्षण के माध्यम से उपभोक्ताओं में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ाना चाहता है। यदि ग्राहक को यह जानकारी हो कि बाजार में बिकने वाले उत्पादों की नियमित जांच हो रही है तो गुणवत्ता को लेकर उसका भरोसा बढ़ सकता है।

साथ ही नियमित जांच से विक्रेताओं पर भी गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव रहता है। इससे बाजार में असुरक्षित या मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

दूध में मिलावट की आशंका लंबे समय से उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय रही है। पानी या अन्य पदार्थों की मिलावट के अलावा दूध को गलत तरीके से संग्रहित करने से भी उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। रैपिड टेस्टिंग की व्यवस्था ऐसी संभावित गड़बड़ियों की शुरुआती पहचान में मददगार हो सकती है।

जागरूकता भी अभियान का अहम हिस्सा

खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के साथ जागरूकता को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। कई बार छोटे दुकानदारों या विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में विभागीय टीमें उन्हें सही भंडारण, साफ-सफाई और गुणवत्ता बनाए रखने के तरीकों के बारे में जानकारी दे सकती हैं।

उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। पैक्ड उत्पाद खरीदते समय निर्माण और एक्सपायरी की तारीख, पैकेजिंग और जरूरी विवरण देखना महत्वपूर्ण है। वहीं दूध जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को विश्वसनीय विक्रेताओं से खरीदने पर जोर दिया जाता है।

मोबाइल टेस्टिंग से जांच में तेजी

‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ अभियान को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ का नमूना लेकर प्रयोगशाला भेजने और उसकी रिपोर्ट आने में समय लग सकता है। मोबाइल व्यवस्था के जरिए कुछ परीक्षण मौके पर ही किए जा सकते हैं।

इससे विभाग को कम समय में अधिक स्थानों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। खासकर दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ के मामले में तेजी से होने वाली प्रारंभिक जांच उपयोगी साबित हो सकती है।

अभियान के दौरान विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में दूध विक्रेताओं, डेयरी दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच जारी रख सकती हैं। अगर किसी जगह गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

कुल मिलाकर TRIPLE T अभियान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के साथ उपभोक्ताओं और विक्रेताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की कोशिश है। ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ और ‘रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट’ के इस्तेमाल से जांच प्रक्रिया को तेज और लोगों के करीब लाने का प्रयास किया गया है। अब इस अभियान के जरिए शहर में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है, इस पर नजर रहेगी।

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