मध्य प्रदेश

तोमर बोले- कुशवाहा समाज के अपमान की सोच भी नहीं सकता

Kavita2
5 Aug 2026 1:40 PM IST
तोमर बोले- कुशवाहा समाज के अपमान की सोच भी नहीं सकता
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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कुशवाहा समुदाय को लेकर की गई अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर बुधवार को खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे सपने में भी कुशवाहा समुदाय का अपमान करने के बारे में नहीं सोच सकते।

दरअसल, तोमर की टिप्पणी को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब 31 जुलाई को वह मुरैना में भाजपा के जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाहा के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कुशवाहा समुदाय की राजनीतिक भूमिका और बदलती निष्ठाओं को लेकर कुछ बातें कही थीं, जिन पर समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई।

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि एक समय कुशवाहा समाज को भारतीय जनता पार्टी का समर्थक माना जाता था। उन्होंने कहा कि यह वह दौर था जब बहुजन समाज पार्टी (BSP) जैसे राजनीतिक संगठन भी अस्तित्व में नहीं आए थे।

तोमर ने अपने संबोधन में कहा था कि भाजपा कुशवाहा समाज के प्रति हमेशा समर्पित और सहनशील रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि बीच-बीच में कुशवाहा समाज की राजनीतिक दिशा में बदलाव आया, जिससे उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

उनके इस बयान के बाद कुशवाहा समाज के कुछ संगठनों और लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय के बारे में इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। विवाद बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सफाई देते हुए अपने बयान पर खेद जताया।

तोमर ने कहा कि कुशवाहा समाज के प्रति उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी समाज को छोटा दिखाना या उसकी भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका दुख है।

राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। कुशवाहा समाज मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माना जाता है। विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने के प्रयास करते रहे हैं।

नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं। वह केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राजनीति में सामाजिक समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए नेताओं के बयानों को लेकर अक्सर संवेदनशीलता देखने को मिलती है। किसी भी समुदाय से जुड़े बयान का राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।

विवाद के बाद तोमर की ओर से खेद जताए जाने को मामले को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि सभी समाजों और वर्गों के प्रति उनका सम्मान है और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

कुशवाहा समुदाय से जुड़े लोगों की नाराजगी के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया था। हालांकि, तोमर के स्पष्टीकरण और खेद व्यक्त करने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि विवाद आगे नहीं बढ़ेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के शब्दों को लेकर कितनी संवेदनशीलता बरती जाती है। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर दिए गए बयानों का असर व्यापक स्तर पर हो सकता है, इसलिए नेताओं से सावधानीपूर्वक भाषा के इस्तेमाल की अपेक्षा की जाती है।

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