मध्य प्रदेश

गणेश विसर्जन को लेकर कड़ी सुरक्षा सात घाटों पर 174 गोताखोर तैनात

Kavita2
22 Sept 2026 10:46 AM IST
गणेश विसर्जन को लेकर कड़ी सुरक्षा सात घाटों पर 174 गोताखोर तैनात
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भोपाल: गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना को रोकने के लिए भोपाल नगर निगम (BMC) ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंगलवार से विसर्जन कार्यक्रम समाप्त होने तक शहर के सात प्रमुख विसर्जन घाटों पर कुल 174 गोताखोर तैनात किए गए हैं। गोताखोर अलग-अलग शिफ्ट में लगातार ड्यूटी करेंगे और किसी आपात स्थिति में तुरंत बचाव अभियान शुरू कर सकेंगे।

नगर निगम ने यह व्यवस्था वर्ष 2019 में खटलापुरा घाट पर हुई गंभीर दुर्घटना को ध्यान में रखते हुए की है। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाव पलटने से उस हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। घटना के बाद से विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती और भीड़ नियंत्रण को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती रही है।

आठ घंटे की शिफ्ट में तैनात रहेंगी टीमें

सुरक्षा व्यवस्था के तहत गोताखोरों को आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में तैनात किया गया है। प्रत्येक शिफ्ट में भोपाल नगर निगम के 58 गोताखोर अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहेंगे। इस तरह तीन शिफ्ट में कुल 174 गोताखोरों की ड्यूटी लगाई गई है।

हर घाट पर लगभग 10 गोताखोरों की टीम मौजूद रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था में पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया गया है। नगर निगम और पुलिस की टीमें मिलकर घाटों पर भीड़ की निगरानी करने के साथ किसी व्यक्ति के गहरे पानी में जाने या अन्य आपात स्थिति पैदा होने पर कार्रवाई करेंगी।

विसर्जन के दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ सकती है। खास तौर पर शाम और रात के समय बड़ी संख्या में लोग प्रतिमाएं लेकर पहुंचते हैं। इसे देखते हुए नगर निगम ने गोताखोरों की ड्यूटी इस तरह निर्धारित की है कि पूरे समय बचाव दल उपलब्ध रहे।

2019 की घटना के बाद सुरक्षा पर विशेष ध्यान

विसर्जन स्थलों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता के पीछे 2019 में खटलापुरा घाट पर हुआ हादसा भी है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई थी। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई थी।

इस हादसे के बाद विसर्जन के दौरान नावों के इस्तेमाल, गहरे पानी में प्रवेश और सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। प्रशासन ने इसके बाद विसर्जन स्थलों पर निगरानी बढ़ाने और प्रशिक्षित बचाव दल तैनात करने जैसे कदमों पर जोर दिया।

इस बार भी नगर निगम ने पहले से तैयारियां शुरू करते हुए गोताखोरों की बड़ी टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। उद्देश्य यह है कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में राहत और बचाव कार्य के लिए बाहर से टीम बुलाने का इंतजार न करना पड़े।

पुलिस भी रहेगी घाटों पर मौजूद

गोताखोरों के साथ पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जाएगी। पुलिस की जिम्मेदारी भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थानों से ही प्रतिमा विसर्जन करने के लिए प्रेरित करने की होगी।

विसर्जन के दौरान अक्सर लोग प्रतिमा लेकर पानी के अंदर तक चले जाते हैं। पानी की गहराई का सही अंदाजा नहीं होने के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश रहेगी कि श्रद्धालु निर्धारित सीमा से आगे न जाएं।

गोताखोर पानी के आसपास लगातार नजर रखेंगे। अगर कोई व्यक्ति पानी में फंसता है या डूबने जैसी स्थिति बनती है तो प्रशिक्षित टीम तत्काल बचाव कार्य शुरू करेगी।

नगर निगम सीमा के बाहर भी गोताखोरों की मांग

भोपाल नगर निगम के गोताखोरों की सेवाएं केवल निगम सीमा के भीतर स्थित घाटों तक सीमित नहीं रहेंगी। नगर निगम की सीमा से बाहर स्थित कुछ पुलिस थानों ने भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए BMC से गोताखोर मांगे हैं।

इनमें इटखेड़ी थाना क्षेत्र भी शामिल है। यहां से नगर निगम के 10 गोताखोरों की सेवाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि ऐसे सभी स्थानों पर प्रशिक्षित गोताखोर उपलब्ध रहें, जहां बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा विसर्जन के लिए पहुंच सकते हैं।

सात प्रमुख घाटों पर विशेष निगरानी

शहर के सात विसर्जन घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इन स्थानों पर अलग-अलग शिफ्ट में बचाव दल मौजूद रहेगा। घाटों पर लोगों की आवाजाही और पानी के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

नगर निगम की टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी शिफ्ट के दौरान निर्धारित स्थान नहीं छोड़ें और बचाव से जुड़े उपकरण तैयार रखें। बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के समय अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी।

प्रतिमा लेकर आने वाली समितियों और श्रद्धालुओं से भी प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को पानी के बिल्कुल नजदीक जाने से रोकने तथा गहरे पानी में उतरने से बचने की सलाह दी जा रही है।

भीड़ बढ़ने पर चुनौती

गणेश विसर्जन के अंतिम दिनों में घाटों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। छोटी प्रतिमाओं के साथ बड़ी सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है। इसके चलते घाटों की ओर जाने वाली सड़कों और विसर्जन स्थलों पर एक साथ बड़ी संख्या में लोग जमा हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति में जल सुरक्षा के साथ भीड़ प्रबंधन भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होती है। पुलिस और नगर निगम की टीमें इसी कारण समन्वय के साथ काम करेंगी।

अधिकारियों की कोशिश रहेगी कि विसर्जन के लिए आने वाले समूहों को क्रमबद्ध तरीके से घाटों तक पहुंचाया जाए। इससे पानी के किनारे अनावश्यक भीड़ जमा होने से रोका जा सकेगा।

श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील

नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें। प्रशिक्षित गोताखोर और पुलिसकर्मी मौजूद रहने के बावजूद व्यक्तिगत सावधानी बेहद जरूरी है।

विशेष रूप से तैरना नहीं जानने वाले लोगों को पानी में उतरने से बचना चाहिए। प्रतिमा विसर्जन के दौरान धक्का-मुक्की नहीं करने और निर्धारित स्थान से ही विसर्जन करने पर जोर दिया गया है।

भोपाल नगर निगम ने 174 गोताखोरों की तैनाती के जरिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश की है। 2019 के खटलापुरा हादसे जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए इस बार पहले से ही घाटों पर बचाव दल तैनात कर दिए गए हैं। विसर्जन कार्यक्रम समाप्त होने तक ये टीमें अलग-अलग शिफ्ट में लगातार निगरानी और आपातकालीन बचाव के लिए तैयार रहेंगी।

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