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भोपाल। ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर मंगलवार शाम भोपाल में आयोजित विशेष कार्यक्रम ने देशभक्ति और संगीत का अनोखा संगम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले इंस्ट्रूमेंटल कलाकार अभय तिवारी ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने एक घंटे तक लगातार 40 से अधिक वाद्य यंत्रों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली घरेलू वस्तुओं से संगीत की प्रस्तुति देकर पहला रिकॉर्ड बनाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। संगीत की अलग-अलग ध्वनियों को एक साथ पिरोते हुए अभय तिवारी ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ ऐसी वस्तुओं का भी इस्तेमाल किया, जिन्हें आमतौर पर संगीत वाद्य के रूप में नहीं देखा जाता। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों का खास ध्यान आकर्षित किया।
एक घंटे की अनोखी प्रस्तुति
अभय तिवारी ने लगातार करीब एक घंटे तक रिले परफॉर्मेंस दी। इस दौरान उन्होंने पियानो, तबला, ढोलक, हारमोनियम और गिटार जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाए। इसके साथ ही उन्होंने टिन के टैंक, पेंट के डिब्बे, बाल्टी, सूटकेस, स्टील की थालियां और खाना पकाने के बर्तनों का इस्तेमाल भी संगीत बनाने के लिए किया।
अलग-अलग वस्तुओं से निकलने वाली आवाजों को संगीत की लय में ढालना उनकी प्रस्तुति का सबसे खास हिस्सा रहा। एक के बाद एक वाद्य यंत्र और वस्तु बदलते हुए उन्होंने बिना लंबे अंतराल के अपनी प्रस्तुति जारी रखी।
दर्शकों ने इस अनोखे प्रयोग को खूब सराहा। पारंपरिक संगीत उपकरणों के साथ घरेलू सामान से संगीत निकालने की कला ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी।
40 से ज्यादा इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल
पहले वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए अभय तिवारी ने 40 से अधिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स और रोजमर्रा की चीजों को अपनी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया। उन्होंने अलग-अलग वाद्य यंत्रों की ध्वनियों को जोड़ते हुए प्रस्तुति को आगे बढ़ाया।
पियानो और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों की धुन के साथ तबला और ढोलक की ताल ने प्रस्तुति में विविधता पैदा की। इसके अलावा स्टील की थालियों, बाल्टियों और बर्तनों जैसी वस्तुओं से ताल और लय तैयार की गई।
यह प्रस्तुति संगीत में प्रयोग और रचनात्मकता का उदाहरण बनी।
‘वंदे मातरम’ से जुड़ा विशेष आयोजन
यह कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित था। राष्ट्रीय गीत के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर आयोजित कार्यक्रम में संगीत के माध्यम से देशभक्ति की भावना को सामने लाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रस्तुतियों के जरिए ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया गया। इसी दौरान अलग-अलग श्रेणियों में रिकॉर्ड बनाने की गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
200 से अधिक छात्रों ने एक साथ गाया
दूसरे वर्ल्ड रिकॉर्ड में विविधा एकेडमी के 200 से अधिक छात्रों ने एक साथ ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का एक साथ राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत करना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
सैकड़ों आवाजों के एक साथ गूंजने से कार्यक्रम स्थल पर देशभक्ति का माहौल बना। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुति देकर इस विशेष आयोजन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति बनी आकर्षण
विविधा एकेडमी के विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। अलग-अलग आयु और पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों ने एक साथ सुर मिलाकर ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया।
सामूहिक गायन के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह दिखाई दिया। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत और देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी था।
संगीत और देशभक्ति का संगम
भोपाल में आयोजित कार्यक्रम ने संगीत को देशभक्ति की भावना से जोड़ने का प्रयास किया। एक ओर अभय तिवारी ने अपनी अनूठी वाद्य प्रस्तुति के जरिए संगीत की विविधता दिखाई, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों ने सामूहिक गायन के जरिए राष्ट्रीय भावना को स्वर दिया।
दोनों प्रस्तुतियों में अलग-अलग शैली होने के बावजूद उनका केंद्र ‘वंदे मातरम’ और उससे जुड़ी राष्ट्रीय भावना रही।
रोजमर्रा की वस्तुओं से निकाली संगीत की धुन
अभय तिवारी की प्रस्तुति की खासियत यह रही कि उन्होंने ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जिन्हें आमतौर पर संगीत के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। टिन के टैंक, पेंट के डिब्बे, बाल्टी और सूटकेस से लेकर स्टील की थालियां और खाना पकाने के बर्तनों तक को उन्होंने संगीत का माध्यम बनाया।
इन वस्तुओं से निकलने वाली अलग-अलग ध्वनियों को ताल और लय में बदलना उनकी कलात्मक क्षमता का हिस्सा रहा। दर्शकों के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास था क्योंकि रोजमर्रा की चीजों को नए रूप में प्रस्तुत किया गया।
एक घंटे तक लगातार प्रस्तुति
रिकॉर्ड बनाने के दौरान अभय तिवारी ने करीब एक घंटे तक लगातार प्रस्तुति दी। इतने लंबे समय तक विभिन्न वाद्य यंत्रों और वस्तुओं को बदलते हुए प्रस्तुति जारी रखना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था।
उन्होंने पियानो, तबला, ढोलक, हारमोनियम और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों के साथ अलग-अलग घरेलू वस्तुओं को भी क्रम से इस्तेमाल किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की रुचि बनी रही और कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का माहौल रहा।
तीन रिकॉर्ड बनने की जानकारी
मंगलवार शाम आयोजित कार्यक्रम में तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने की जानकारी सामने आई। पहले रिकॉर्ड में अभय तिवारी की एकल प्रस्तुति शामिल रही, जबकि दूसरे रिकॉर्ड में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन किया।
तीसरे रिकॉर्ड से संबंधित विस्तृत जानकारी कार्यक्रम के दौरान सामने नहीं आई है। हालांकि आयोजकों के लिए तीन रिकॉर्ड बनना इस आयोजन की बड़ी उपलब्धि रही।
युवाओं की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी ने इसे युवा केंद्रित भी बनाया। 200 से अधिक छात्रों का एक साथ राष्ट्रीय गीत गाना सामूहिक भागीदारी का उदाहरण रहा।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जोड़ने का अवसर मिलता है। सामूहिक गायन में अनुशासन, तालमेल और टीमवर्क भी महत्वपूर्ण होता है।
भोपाल में यादगार बना आयोजन
‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम संगीत और देशभक्ति के अनोखे मेल के कारण चर्चा में रहा। अभय तिवारी की 40 से अधिक वाद्य यंत्रों और घरेलू वस्तुओं वाली प्रस्तुति ने जहां रचनात्मकता दिखाई, वहीं विविधा एकेडमी के विद्यार्थियों के सामूहिक गायन ने कार्यक्रम को भावनात्मक रंग दिया।
तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने की उपलब्धि ने आयोजन को और खास बना दिया। संगीत, विद्यार्थियों की भागीदारी और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भोपाल में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक यादगार आयोजन के रूप में सामने आया।





