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मध्य प्रदेश
बुजुर्ग और आदिवासी पीड़ितों की बढ़ती संख्या, NCRB रिपोर्ट ने दिया संकेत
Payal
7 May 2026 7:06 PM IST

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Bhopal.भोपाल: हाल ही में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की अपराध स्थिति को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बच्चों की सुरक्षा पर काफी हद तक नियंत्रण है, लेकिन इसके विपरीत बुजुर्गों और आदिवासियों के खिलाफ अपराध सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।
NCRB रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में पिछले साल की तुलना में कम गिरावट आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में बच्चों के लिए सुरक्षा उपाय प्रभावी हैं। स्कूलों, बाल संरक्षण समितियों और स्थानीय पुलिस की सतर्कता बच्चों के प्रति अपराधों को रोकने में मदद कर रही है।
वहीं, बुजुर्ग और आदिवासी समुदाय सबसे अधिक अत्याचार और अपराधों के शिकार बने हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विशेषकर आदिवासी और बुजुर्ग, घरेलू हिंसा, शोषण, जमीनी विवाद और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं में ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग और आदिवासियों की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर विशेष अभियान चलाने चाहिए, ताकि इन वर्गों को अपराधों से बचाया जा सके।
राज्य में बच्चों के प्रति अपराधों में कमी के बावजूद, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि बाल यौन शोषण, बाल मजदूरी और ऑनलाइन खतरों से पूरी तरह निपटना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए तकनीकी निगरानी, जागरूकता कार्यक्रम और स्कूल सुरक्षा उपाय लगातार आवश्यक हैं।
NCRB रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर में मामूली वृद्धि हुई है। हालांकि बच्चों की तुलना में यह संख्या कम है, लेकिन यह संकेत देती है कि सामाजिक सुरक्षा के उपायों में सुधार की आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे बुजुर्ग और आदिवासी वर्ग के लिए विशेष सुरक्षा कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस चौकियों की संख्या बढ़ाना, हेल्पलाइन और जागरूकता अभियानों को तेज करना शामिल होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि NCRB रिपोर्ट के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सुरक्षा असमानता सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच और बढ़ रही है। इसलिए, बच्चों की सुरक्षा के सफल प्रयासों को अन्य वर्गों पर भी लागू करना राज्य के लिए चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।
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