मध्य प्रदेश

यात्री का सामान चोरी हुआ तो जवाब देगा कोच अटेंडर

Ratna Netam
15 Aug 2026 2:57 PM IST
यात्री का सामान चोरी हुआ तो जवाब देगा कोच अटेंडर
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भोपाल। ट्रेनों के वातानुकूलित कोच में यात्रियों के सामान की चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए रेलवे ने सख्त रुख अपनाया है। नए निर्देशों के अनुसार एसी कोच में चोरी होने पर केवल चोर की तलाश नहीं की जाएगी, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद कोच अटेंडर की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। जांच के दौरान अटेंडर की लापरवाही या संदिग्ध भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
रेल मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में एसी कोच में यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया है। किसी कोच में चोरी होने पर यह देखा जाएगा कि घटना के समय अटेंडर कहां था, उसने अपनी ड्यूटी सही तरीके से निभाई या नहीं और कोच में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
रेलवे का उद्देश्य हर चोरी के मामले में कोच अटेंडर को सीधे दोषी ठहराना नहीं है। मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर की जाएगी। अटेंडर की ड्यूटी, मौजूदगी, गतिविधियों और यात्रियों की ओर से दी गई जानकारी का परीक्षण किया जाएगा। यदि उसके स्तर पर लापरवाही या किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है तो विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
रेलवे पुलिस के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के विदिशा जीआरपी थाना क्षेत्र में तीन वर्षों के दौरान चोरी के 116 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या एसी कोच में यात्रियों के सामान की चोरी से जुड़ी बताई गई है। स्लीपर और सामान्य श्रेणी के डिब्बों की तुलना में एसी कोच में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे पुलिस और संबंधित अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्वालियर जीआरपी क्षेत्र के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। यहां वर्ष 2022 में एसी कोच में चोरी के 109 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 129 हो गई। इसके बाद वर्ष 2024 में चोरी के मामलों में तेज वृद्धि हुई और आंकड़ा 334 तक पहुंच गया। लगातार बढ़ते मामलों के कारण एसी कोच की सुरक्षा व्यवस्था तथा रेलवे कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे थे।
रेलवे नेटवर्क से जुड़े कुछ मामलों में कोच अटेंडरों की भूमिका पहले भी जांच के दायरे में आ चुकी है। इसी वर्ष ट्रेन के माध्यम से वन्यजीवों की तस्करी के एक मामले में एक कोच अटेंडर को मुख्य आरोपी बनाया गया था। उसके कब्जे से दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजातियों के 311 जीवित कछुए बरामद किए गए थे। सामान चोरी से जुड़े कुछ अन्य मामलों में भी अटेंडरों की भूमिका की जांच की गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। एसी कोच में यात्रा करने वाले लोगों का सामान सुरक्षित रहे और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके, इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। इससे ड्यूटी के दौरान लापरवाही कम होने और कोच में संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही पर रोक लगने की उम्मीद है।
रेलवे ने यात्रियों से भी सफर के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। यात्रियों को नकदी, मोबाइल फोन, आभूषण और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखना चाहिए। रात के समय सामान को बिना निगरानी नहीं छोड़ना चाहिए और बैग को सीट के नीचे चेन से बांधकर रखना बेहतर है। किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस, कोच स्टाफ या ट्रेन के अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों को दी जानी चाहिए।
विदिशा और ग्वालियर में सामने आए आंकड़ों से साफ है कि एसी कोच में यात्रियों के सामान की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। रेलवे को उम्मीद है कि नए निर्देशों के बाद चोरी की हर घटना की व्यापक जांच होगी और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होने से सुरक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा।
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