मध्य प्रदेश

केसरी वाटिका में शुरू हुआ जैन श्वेतांबर संघ का चातुर्मास स्थापना महोत्सव

Kavita2
29 July 2026 12:55 PM IST
केसरी वाटिका में शुरू हुआ जैन श्वेतांबर संघ का चातुर्मास स्थापना महोत्सव
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : श्री सौभाग्य बहुतोपच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्रीमंड संघ का चातुर्मास स्थापना महोत्सव हाल ही में केसरी वाटिका, तलावली चांदा में विधिवत रूप से शुरू हुआ। आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी, संवत 2083 के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के साथ जैन समाज के चार महीने लंबे चातुर्मास अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ।

जैन परंपरा में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवधि में साधु-साध्वियां एक स्थान पर रहकर धर्म साधना, प्रवचन और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हैं। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष का चातुर्मास कार्यक्रम केसरी वाटिका में आयोजित किया जा रहा है।

आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजन

चातुर्मास महोत्सव का आयोजन जैनाचार्य हृदयसम्राट धर्म दिवाकर पूज्य आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उनके सानिध्य में चार महीने तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आयोजन समिति के अनुसार, चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और आध्यात्मिक जीवन के महत्व से जुड़ी शिक्षाएं दी जाएंगी। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

प्रतिदिन होंगे धर्मसभा और प्रवचन

चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें धर्मसभा, प्रवचन और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां प्रमुख रूप से शामिल होंगी।

श्रद्धालुओं के लिए हर सुबह 9:15 बजे से 10:15 बजे तक केसरी वाटिका में विशेष रूप से बनाए गए पंडाल में धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। इसमें आचार्य श्री के मार्गदर्शन में धर्म और जीवन मूल्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की है।

चातुर्मास का धार्मिक महत्व

जैन धर्म में चातुर्मास को आत्मचिंतन, साधना और धार्मिक अनुशासन का समय माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर तप, स्वाध्याय और धर्म प्रचार करते हैं।

इस अवधि में श्रद्धालु भी धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं और उपवास, पूजा, प्रवचन श्रवण तथा सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं।

जैन समाज में चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक पर्व और अनुष्ठान भी मनाए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।

मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह भी होंगे आयोजित

आयोजन समिति के अनुसार, चातुर्मास के दौरान मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन भी किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म की परंपराओं और सिद्धांतों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

समिति की ओर से आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रवचन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए पंडाल में बैठने, व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा गया है।

श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल

चातुर्मास स्थापना महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही जैन समाज में उत्साह का वातावरण है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन स्थल पर पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि चातुर्मास के दौरान होने वाले प्रवचन और धार्मिक आयोजन जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करते हैं। यह समय आत्ममंथन और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

चार महीने तक चलेगा आध्यात्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला

चातुर्मास स्थापना के साथ शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन अगले चार महीनों तक चलेगा। इस दौरान नियमित रूप से प्रवचन, धर्मसभा और अन्य धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

आयोजन समिति ने बताया कि पूरे चातुर्मास काल में श्रद्धालुओं के लिए कई विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना है।

केसरी वाटिका में शुरू हुआ यह चातुर्मास महोत्सव जैन समाज के लिए आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है। आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में होने वाले इन आयोजनों से श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

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