मध्य प्रदेश

भिंड में डिजिटल हाजिरी के लिए जान जोखिम में डाल रहे शिक्षक

Kavita2
25 Aug 2026 4:08 PM IST
भिंड में डिजिटल हाजिरी के लिए जान जोखिम में डाल रहे शिक्षक
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भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में डिजिटल गवर्नेंस और जमीनी सुविधाओं के बीच का अंतर बारिश के मौसम में साफ दिखाई दे रहा है। जिले के एक दूरदराज गांव में शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचने और अनिवार्य ई-हाजिरी दर्ज कराने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करने को मजबूर हैं। नाला पार करने के लिए शिक्षक इनर ट्यूब का सहारा लेते हैं। बारिश के दौरान तेज बहाव के बीच यह सफर कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

यह मामला भिंड की ग्राम पंचायत बाबेड़ी से सामने आया है। यहां नादरौली और सुमेर सिंह का पुरा को जोड़ने वाला रास्ता मानसून के दौरान मौसमी ‘खार’ नाले में पानी बढ़ने के बाद पूरी तरह कट जाता है। रास्ते पर न पुलिया है और न ही ग्रामीणों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग। ऐसे में बारिश के दिनों में गांव के शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय लोगों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है।

ई-हाजिरी के लिए समय पर पहुंचना चुनौती

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। शिक्षकों के लिए समय पर स्कूल पहुंचना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ई-हाजिरी लगाना जरूरी है। लेकिन बाबेड़ी पंचायत के इस इलाके में प्राकृतिक परिस्थितियां ही उनके सामने सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं।

बारिश के दौरान नाले में पानी भरने के बाद सामान्य रास्ते से स्कूल पहुंचना संभव नहीं रहता। शिक्षक यदि समय पर स्कूल पहुंचना चाहते हैं तो उन्हें नाले के तेज बहाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इनर ट्यूब के सहारे नाला पार करना उनकी मजबूरी बन गया है।

तेज बहाव में पार करना जोखिम भरा

नाले में पानी बढ़ने के बाद उसका बहाव तेज हो जाता है। ऐसे में इनर ट्यूब के सहारे पानी पार करना बेहद जोखिम भरा है। थोड़ी सी असावधानी या संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति पानी के तेज बहाव में बह सकता है।

शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों और ग्रामीणों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान गांव का संपर्क प्रभावित होने से दैनिक जरूरतों के लिए बाहर जाना भी चुनौती बन जाता है।

स्थानीय लोगों के लिए यह समस्या नई नहीं है। हर साल मानसून के दौरान मौसमी खार में पानी भरने पर रास्ता बाधित हो जाता है। इसके बावजूद अब तक यहां ऐसी स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे बारिश के दौरान सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।

पुलिया नहीं होने से बढ़ी परेशानी

नादरौली और सुमेर सिंह का पुरा को जोड़ने वाले रास्ते पर पुलिया या पर्याप्त ऊंचाई वाला सुरक्षित मार्ग नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हो जाती है। सामान्य दिनों में ग्रामीण इस रास्ते से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही नाले में पानी भरने के बाद रास्ता पूरी तरह कट जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां एक मजबूत पुलिया या छोटा पुल बना दिया जाए तो बारिश के मौसम में समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में सुविधा होगी और ग्रामीणों को भी रोजमर्रा के कामों के लिए सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा।

शिक्षा व्यवस्था पर भी असर

बारिश के कारण रास्ता बंद होने का असर केवल शिक्षकों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों की नियमित उपस्थिति पहले ही कई कारणों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बाधित होना उनकी पढ़ाई पर अतिरिक्त असर डाल सकता है।

शिक्षकों के सामने भी दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ उन्हें समय पर स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को पढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था के तहत अपनी हाजिरी दर्ज करनी होती है। सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं होने के बावजूद समय पर स्कूल पहुंचने का दबाव उन्हें जोखिम उठाने के लिए मजबूर करता है।

डिजिटल व्यवस्था के साथ जरूरी है जमीनी ढांचा

यह मामला डिजिटल गवर्नेंस की व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं के बीच के अंतर को भी सामने लाता है। तकनीक के माध्यम से कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू की जा रही है, लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में स्कूल तक पहुंचने के लिए अभी भी बुनियादी सड़क और पुलिया जैसी सुविधाओं की कमी है।

स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों और शिक्षकों की समस्या का स्थायी समाधान पुलिया या सुरक्षित मार्ग के निर्माण से ही संभव माना जा रहा है। मानसून से पहले ऐसे रास्तों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्माण कार्य कराया जाए तो हर साल सामने आने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है।

फिलहाल बारिश के दौरान नाला भरने पर इनर ट्यूब के सहारे उसे पार करने की तस्वीरें ग्रामीण इलाकों में मौजूद सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं। जहां सरकारी व्यवस्था शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी पर जोर दे रही है, वहीं भिंड का यह गांव यह सवाल पूछ रहा है कि स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने की व्यवस्था कब होगी। बारिश खत्म होने के बाद रास्ता सामान्य हो सकता है, लेकिन अगली बारिश में यही समस्या फिर खड़ी न हो, इसके लिए स्थायी समाधान जरूरी है।

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