मध्य प्रदेश

29 सितंबर को महाकालेश्वर का अलौकिक रूप, भस्म आरती में उमड़ी आस्था

nidhi
29 Sept 2026 8:56 AM IST
29 सितंबर को महाकालेश्वर का अलौकिक रूप, भस्म आरती में उमड़ी आस्था
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उज्जैन में महाकाल का मनमोहक श्रृंगार
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 29 सितंबर को तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्र और बिल्व पत्र अर्पित किए गए, जिसके बाद उनका अलौकिक स्वरूप भक्तों के दर्शन के लिए प्रस्तुत हुआ। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के जयकारे लगाए और मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। सुबह मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और अन्य पूजन सामग्री से पंचामृत अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया और उन्हें भस्म अर्पित की गई।
चंद्र और बिल्व पत्र से हुआ श्रृंगार
भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के मस्तक पर विशेष रूप से चंद्र का स्वरूप सजाया गया। इसके साथ ही भगवान शिव को प्रिय बिल्व पत्र अर्पित किए गए। फूलों और अन्य पूजन सामग्री से बाबा का श्रृंगार बेहद आकर्षक दिखाई दिया। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और भगवान महाकाल की आरती उतारी। इस दौरान ढोल, नगाड़े और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया।
भस्म आरती के लिए उमड़े श्रद्धालु
महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 29 सितंबर की सुबह भी मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
भस्म आरती भगवान महाकाल की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने के लिए पहले से व्यवस्था करते हैं।
भगवान महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान महाकाल के दर्शन और पूजन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती मंदिर की सबसे प्रसिद्ध पूजा विधियों में शामिल है। इसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया जाता है।
भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
भस्म आरती के दौरान मंदिर में हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारे गूंजते रहे। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
29 सितंबर को चंद्र और बिल्व पत्र से सजे बाबा महाकाल के दर्शन ने भक्तों को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति कराई। सुबह की आरती के बाद दिनभर दर्शन का क्रम जारी रहा।
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