मध्य प्रदेश

निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर 800 रुपये प्रति वर्ग फुट अनुदान

Kavita2
4 Oct 2026 10:09 AM IST
निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर 800 रुपये प्रति वर्ग फुट अनुदान
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इंदौर। प्रदेश में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने और नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य सरकार ने बड़ी घोषणा की है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप ने शनिवार को कहा कि नए निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने वाले उद्यमियों को सरकार की ओर से 800 रुपये प्रति वर्ग फुट का अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही नए लघु उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया गया है।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप ने इंदौर में आयोजित लघु उद्योग भारती के ‘उद्यम समागम-2026’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने और नए लघु उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का फोकस ऐसे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर है, जो नए उद्योग शुरू करना चाहते हैं और रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

कश्यप ने कहा कि नए निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से छोटे उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। इसके लिए सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना चाहती है। इसी उद्देश्य से निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने वाले उद्यमियों को 800 रुपये प्रति वर्ग फुट का अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।

सरकार का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए जमीन के साथ सड़क, बिजली, पानी और दूसरी आधारभूत सुविधाओं पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। इससे निजी क्षेत्र के लिए नए औद्योगिक परिसर विकसित करना महंगा हो जाता है। अनुदान की व्यवस्था से इस शुरुआती लागत को कम करने और निजी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

एमएसएमई मंत्री ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में अधिक से अधिक लघु उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करना है। लघु और मध्यम उद्योगों को रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। बड़े उद्योगों की तुलना में छोटे उद्योग अपेक्षाकृत कम निवेश में शुरू किए जा सकते हैं और स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं।

इसी दिशा में राज्य सरकार ने नए लघु उद्योगों की स्थापना के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया है। इससे नए उद्यमियों के लिए कारोबार शुरू करने की लागत कम हो सकती है। सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक सहायता मिलने से युवा और नए कारोबारी भी उद्योग लगाने के लिए आगे आएंगे।

प्रदेश में नए निजी औद्योगिक क्षेत्रों का विकास होने से उन इलाकों को भी फायदा मिल सकता है, जहां फिलहाल उद्योगों के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है। यदि छोटे शहरों और कस्बों के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होते हैं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही आसपास के व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी इसका फायदा मिल सकता है।

सरकार की योजना केवल मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तक सीमित नहीं है। नए निवेश क्षेत्रों को विकसित कर औद्योगिक गतिविधियों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। निजी उद्यमियों को आर्थिक सहायता देने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

एमएसएमई सेक्टर देश और राज्यों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे उद्योग उत्पादन के साथ रोजगार, स्थानीय कारोबार और सप्लाई चेन को मजबूत करने में योगदान देते हैं। किसी क्षेत्र में नया उद्योग स्थापित होने पर प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, पैकेजिंग, कच्चे माल, मरम्मत और दूसरी सेवाओं में भी काम के अवसर पैदा होते हैं।

‘उद्यम समागम-2026’ के मंच से की गई घोषणा उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस आयोजन में लघु उद्योगों और उद्यमिता से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। समापन सत्र में एमएसएमई मंत्री ने सरकार की औद्योगिक नीति और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की जानकारी दी।

निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए 800 रुपये प्रति वर्ग फुट के अनुदान का लाभ मिलने से ऐसे उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल सकता है, जो औद्योगिक परिसर विकसित करना चाहते हैं। हालांकि इस सहायता का लाभ लेने के लिए पात्रता, क्षेत्रफल, निवेश और अन्य शर्तें संबंधित सरकारी नियमों और योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होंगी।

इसके साथ 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान नए उद्योग लगाने वालों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उद्योग स्थापित करने के शुरुआती दौर में मशीनरी, भवन, जमीन और आधारभूत सुविधाओं पर बड़ा निवेश करना पड़ता है। सब्सिडी मिलने से उद्यमियों पर शुरुआती वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार का जोर इस बात पर भी है कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें। छोटे और मध्यम उद्योग स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि औद्योगिक क्षेत्र छोटे शहरों तक पहुंचते हैं तो रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कम करने में भी मदद मिल सकती है।

लघु उद्योगों के विस्तार से स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने और नए कारोबारी नेटवर्क विकसित होने की संभावना भी बढ़ती है। नए उद्योग शुरू होने पर स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की मांग बढ़ सकती है और छोटे सप्लायरों तथा सेवा प्रदाताओं को कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप ने स्पष्ट किया कि सरकार नए उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। निजी औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने में सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध जमीन और सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

सरकार की इस घोषणा के बाद अब उद्योग जगत की नजर इसके क्रियान्वयन पर रहेगी। खासतौर पर 800 रुपये प्रति वर्ग फुट के अनुदान और नए लघु उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ किन शर्तों के तहत मिलेगा, यह उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल ‘उद्यम समागम-2026’ में हुई इस घोषणा से प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य निजी निवेश को बढ़ावा देने के साथ नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना और अधिक से अधिक लघु उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर पैदा करना है। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले समय में प्रदेश के औद्योगिक विस्तार में छोटे उद्योगों की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

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