मध्य प्रदेश

7-10 MM के छोटे चीरे से हो सकेगी स्पाइन सर्जरी, इंदौर में जुटेंगे विशेषज्ञ

Kavita2
24 Sept 2026 10:31 AM IST
7-10 MM के छोटे चीरे से हो सकेगी स्पाइन सर्जरी, इंदौर में जुटेंगे विशेषज्ञ
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इंदौर। चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कई समस्याओं के उपचार के लिए महत्वपूर्ण मिनिमली इनवेसिव तकनीक के रूप में उभर रही है। इस तकनीक की मदद से कुछ चुनिंदा प्रकार की स्पाइन सर्जरी महज 7 से 10 मिलीमीटर के छोटे चीरे के जरिए की जा सकती हैं। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें अपेक्षाकृत कम चीर-फाड़ की जरूरत पड़ती है और सर्जन हाई-डेफिनिशन कैमरे की मदद से प्रभावित हिस्से को स्पष्ट रूप से देखकर ऑपरेशन कर सकते हैं।

स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नए विकास और एंडोस्कोपिक तकनीकों पर चर्चा के लिए इंदौर में 25 से 27 सितंबर तक तीन दिवसीय ‘EndoSpineCon 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इसका आयोजन इंदौर स्पाइनल वेलफेयर सोसाइटी और इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन की ओर से किया जा रहा है। सम्मेलन में स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ आधुनिक तकनीकों, उपचार पद्धतियों और अपने अनुभवों को साझा करेंगे।

इस वर्ष कॉन्फ्रेंस की थीम “लर्निंग कर्व से ग्लोबल एक्सीलेंस तक” रखी गई है। इसके जरिए एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी सीखने की शुरुआती प्रक्रिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता हासिल करने तक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में नई तकनीकों के इस्तेमाल, उनकी चुनौतियों और मरीजों के लिए उपयुक्त सर्जिकल विकल्प चुनने जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ विचार रखेंगे।

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में एक छोटे चीरे के माध्यम से विशेष उपकरण और एंडोस्कोप शरीर के अंदर पहुंचाए जाते हैं। एंडोस्कोप में लगा हाई-डेफिनिशन कैमरा प्रभावित हिस्से की तस्वीर स्क्रीन पर दिखाता है। इससे सर्जन रीढ़ की हड्डी के आसपास की नसों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं और जरूरत के अनुसार सर्जिकल प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

तकनीक की खासियत यह है कि चुनिंदा मामलों में बड़े चीरे की जरूरत कम हो सकती है। छोटे चीरे के कारण आसपास के ऊतकों और मांसपेशियों पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यह तकनीक हर मरीज या रीढ़ की हर बीमारी के लिए उपयुक्त नहीं होती। किस मरीज में एंडोस्कोपिक सर्जरी की जा सकती है, इसका निर्णय बीमारी की प्रकृति, जांच रिपोर्ट, मरीज की स्थिति और स्पाइन सर्जन के मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।

रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं में कमर और गर्दन का दर्द, नसों पर दबाव, डिस्क से संबंधित समस्याएं और स्पाइनल कैनाल में संकुचन जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। इनमें से कुछ मामलों में पहले दवाइयों, फिजियोथेरेपी और अन्य गैर-सर्जिकल उपचारों का इस्तेमाल किया जाता है। जब इनसे पर्याप्त राहत नहीं मिलती और चिकित्सकीय रूप से सर्जरी की आवश्यकता सामने आती है, तब मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग सर्जिकल विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

एंडोस्कोपिक तकनीक के विकास ने स्पाइन सर्जरी में डॉक्टरों को कुछ मामलों में कम चीर-फाड़ वाला विकल्प उपलब्ध कराया है। हाई-डेफिनिशन विजुअलाइजेशन इसकी महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। कैमरे से मिलने वाली स्पष्ट तस्वीर सर्जन को ऑपरेशन वाले हिस्से को करीब से देखने में मदद करती है। इसके साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

इस तकनीक में विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण है। एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की अपनी एक ‘लर्निंग कर्व’ होती है। इसका मतलब है कि सर्जन को इस तकनीक में दक्षता हासिल करने के लिए प्रशिक्षण और पर्याप्त अनुभव की जरूरत होती है। इसी पहलू को EndoSpineCon 2026 की थीम में भी प्रमुखता दी गई है।

25 से 27 सितंबर तक आयोजित होने वाले सम्मेलन में विशेषज्ञों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान किया जाएगा। एंडोस्कोपिक सर्जरी की वर्तमान स्थिति, नई तकनीक, उपकरणों में हो रहे बदलाव और जटिल मामलों में उपचार के विकल्प जैसे विषय चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे सम्मेलन डॉक्टरों को एक ही मंच पर विभिन्न तकनीकों और अनुभवों पर चर्चा करने का अवसर देते हैं।

आयोजकों का फोकस एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी को लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी साझा करने पर रहेगा। इसमें यह समझना भी महत्वपूर्ण होगा कि किन परिस्थितियों में यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी का विकल्प बन सकती है और किन मामलों में दूसरी सर्जिकल पद्धतियां अधिक उपयुक्त हो सकती हैं।

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के प्रति चिकित्सा क्षेत्र में रुचि बढ़ी है क्योंकि इसका उद्देश्य आवश्यक सर्जिकल उपचार करते हुए आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर प्रभाव को यथासंभव सीमित रखना होता है। लेकिन किसी भी सर्जरी की तरह एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में भी जोखिम और सीमाएं हो सकती हैं। इसलिए मरीजों को केवल योग्य स्पाइन विशेषज्ञ की सलाह और उचित जांच के बाद ही उपचार का विकल्प चुनना चाहिए।

इंदौर में होने वाला EndoSpineCon 2026 इसी तेजी से विकसित होते क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की तकनीकी बारीकियों से लेकर वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही नई पद्धतियों तक विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। सम्मेलन का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुभव और आधुनिक तकनीक के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में विशेषज्ञता को आगे बढ़ाना है।

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