मध्य प्रदेश

पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइन

Kavita2
22 Sept 2026 3:11 PM IST
पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइन
x

भोपाल: मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब पुलिस की वर्दी पहनकर रील्स, शॉर्ट्स या किसी भी तरह का सोशल मीडिया वीडियो बनाना पुलिसकर्मियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। पुलिस मुख्यालय ने वर्दी की गरिमा, विभागीय अनुशासन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मियों को वर्दी में व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ाने या सोशल मीडिया के जरिए निजी आर्थिक लाभ लेने वाले कंटेंट से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। यानी पुलिस की वर्दी को व्यक्तिगत ब्रांडिंग या कमाई के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

वर्दी में रील्स बनाने पर रोक

नई गाइडलाइंस का सबसे अहम हिस्सा पुलिस की वर्दी में सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने से जुड़ा है। पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर रील, शॉर्ट वीडियो या अन्य मनोरंजनात्मक सामग्री तैयार करने पर सख्ती बरतने की बात कही गई है।

पुलिस विभाग में वर्दी केवल ड्यूटी की पहचान नहीं बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में विभाग का मानना है कि वर्दी में बनाए गए निजी वीडियो से पुलिस की पेशेवर छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर वर्दी के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

निजी लोकप्रियता बढ़ाने पर भी नजर

नई गाइडलाइंस में पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के व्यावसायिक और व्यक्तिगत पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है। पुलिसकर्मी अपनी निजी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए वर्दी या पद का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए पुलिस की ड्यूटी, वर्दी या सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले कंटेंट से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत सोशल मीडिया गतिविधियों और उनकी सरकारी जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना है।

सोशल मीडिया से कमाई पर भी रोक

पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी या पुलिस पद की पहचान का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया से पैसे कमाने की गतिविधियों को भी नई गाइडलाइंस के दायरे में रखा गया है।

यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाकर कमाई करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी और विभागीय पहचान का इस्तेमाल विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है।

यदि कोई पुलिसकर्मी सोशल मीडिया कंटेंट के जरिए निजी आर्थिक लाभ हासिल करता है और उसमें पुलिस की वर्दी या पद का इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस की छवि और अनुशासन पर जोर

पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर यह कदम पुलिस विभाग की सार्वजनिक छवि और अनुशासन से जुड़ा हुआ है। पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर जो भी सामग्री साझा करते हैं, उसका असर कई बार पूरे विभाग की छवि पर पड़ सकता है।

वर्दी में बनाए गए किसी वीडियो को लोग व्यक्तिगत गतिविधि के बजाय पुलिस विभाग से जोड़कर देख सकते हैं। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय ने वर्दी की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया है।

सुरक्षा कारणों से भी सावधानी

पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों में सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। वीडियो बनाते समय कई बार पुलिसकर्मी अनजाने में अपनी तैनाती, स्थान, हथियार, वाहन, कार्यालय या अन्य संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं।

ऐसी जानकारी का दुरुपयोग किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस मुख्यालय की गाइडलाइंस में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा संबंधी सावधानी को भी महत्व दिया गया है।

ड्यूटी से जुड़ी जानकारी साझा करने में सावधानी

पुलिसकर्मियों के लिए ड्यूटी से संबंधित संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करना भी जोखिम पैदा कर सकता है। किसी ऑपरेशन, जांच, सुरक्षा व्यवस्था या पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने पर विभागीय काम प्रभावित हो सकता है।

इसी कारण पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय विभागीय नियमों और गोपनीयता का ध्यान रखने की जरूरत होगी।

मनोरंजन और सरकारी जिम्मेदारी में अंतर

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण पुलिसकर्मी भी इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर सक्रिय दिखाई देते हैं। कई बार पुलिस की वर्दी में मनोरंजनात्मक वीडियो वायरल भी हो जाते हैं।

नई गाइडलाइंस का उद्देश्य निजी सोशल मीडिया इस्तेमाल को पूरी तरह खत्म करना नहीं बल्कि वर्दी, सरकारी पद और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों के बीच सीमा तय करना है।

पुलिसकर्मी निजी जीवन में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय विभागीय अनुशासन और निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

उल्लंघन पर हो सकती है विभागीय कार्रवाई

नई गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई की प्रकृति मामले की गंभीरता और उल्लंघन की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी।

पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा, अनुशासन या सुरक्षा प्रभावित न हो।

अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को इन दिशा-निर्देशों की जानकारी देने और उनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की सलाह

सोशल मीडिया आज सूचना और संवाद का बड़ा माध्यम है। पुलिस विभाग भी कई प्लेटफॉर्म के जरिए जनता तक सूचनाएं पहुंचाता है। लेकिन व्यक्तिगत और आधिकारिक सोशल मीडिया गतिविधियों में अंतर बनाए रखना जरूरी है।

पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना होगा कि उनकी पहचान सरकारी कर्मचारी के रूप में भी होती है। इसलिए किसी भी पोस्ट या वीडियो का विभाग की छवि पर असर पड़ सकता है।

वर्दी की गरिमा बनाए रखना प्राथमिकता

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की नई गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य पुलिस की वर्दी की गरिमा बनाए रखना, विभागीय अनुशासन कायम रखना और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करना है।

अब पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी में रील्स, शॉर्ट्स या निजी वीडियो बनाकर लोकप्रियता हासिल करना अथवा कमाई करना आसान नहीं होगा। ऐसे मामलों में विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

इस फैसले के बाद पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा और वर्दी तथा सरकारी पद के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

Next Story