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रिन्यूएबल एनर्जी के दौर में स्मार्ट ग्रिड और AI तकनीक जरूरी: SGSITS विशेषज्ञ

इंदौर : भारत में तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के बीच पावर ग्रिड को अधिक मजबूत, भरोसेमंद और किफायती बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट टेक्नोलॉजी को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) के तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों के बढ़ते उपयोग के साथ पारंपरिक बिजली प्रबंधन प्रणालियां पर्याप्त नहीं रह गई हैं।
संस्थान में आयोजित मॉडर्न एनर्जी मैनेजमेंट पर चार दिवसीय लेक्चर सीरीज के समापन कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बदलावों और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अकादमिक विशेषज्ञ आरएस तारे ने कहा कि भारत जिस तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए बिजली ग्रिड में आधुनिक तकनीकों का समावेश समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि सोलर और विंड एनर्जी से मिलने वाली बिजली में लगातार बदलाव होता रहता है। मौसम की स्थिति के अनुसार उत्पादन में उतार-चढ़ाव आता है, जिससे बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में पुराने पावर डिस्पैच मॉडल अब पर्याप्त प्रभावी नहीं रह गए हैं।
आरएस तारे ने कहा कि भविष्य के पावर सिस्टम को डेटा आधारित और अधिक स्मार्ट बनाने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ऑप्टिमाइजेशन टूल्स की मदद से बिजली उत्पादन, वितरण और मांग का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। इससे कम से कम परिचालन लागत में उपभोक्ताओं तक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाई जा सकेगी।
उन्होंने युवा इंजीनियरों से अपील की कि वे ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को समझें और डेटा आधारित समाधान विकसित करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भूमिका केवल पारंपरिक बिजली प्रणालियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें डिजिटल तकनीक, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों की जानकारी भी रखनी होगी।
लेक्चर सीरीज के दौरान विशेषज्ञों ने स्मार्ट ग्रिड की भूमिका पर भी चर्चा की। स्मार्ट ग्रिड ऐसी आधुनिक बिजली प्रणाली है, जिसमें डिजिटल तकनीक और सेंसर की मदद से बिजली उत्पादन और वितरण की निगरानी बेहतर तरीके से की जाती है। इससे बिजली की खपत, मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल बनाने में सहायता मिलती है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि स्मार्ट ग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल टूल्स के कारण इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि आज के इंजीनियरों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं, बल्कि वास्तविक ग्रिड संचालन और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक समझ भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को बदलते ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार तैयार करें। इसके लिए जरूरी है कि कक्षा में पढ़ाई जाने वाली तकनीकी अवधारणाओं को वास्तविक दुनिया के पावर सिस्टम से जोड़ा जाए। इससे छात्र भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बिजली प्रबंधन को भी अधिक प्रभावी बनाना होगा। रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ ग्रिड स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसका समाधान आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से ही संभव है।
उन्होंने बताया कि AI आधारित सिस्टम बिजली की मांग का पूर्वानुमान लगाने, ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रिड में संभावित समस्याओं की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। इससे बिजली कंपनियों को समय रहते निर्णय लेने में सुविधा होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
चार दिवसीय लेक्चर सीरीज में ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और भविष्य की बिजली प्रणालियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। इसमें छात्रों और शोधार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों की संभावनाओं को समझा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का ऊर्जा क्षेत्र बड़े बदलावों से गुजरेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के साथ बिजली नेटवर्क को भी आधुनिक बनाना होगा।
SGSITS के विशेषज्ञों ने कहा कि यदि भारत को स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य हासिल करने हैं और बढ़ती बिजली मांग को पूरा करना है तो स्मार्ट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना अनिवार्य होगा।
कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ नवाचार पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भविष्य के ऊर्जा क्षेत्र में वही इंजीनियर सफल होंगे, जो पारंपरिक इलेक्ट्रिकल ज्ञान के साथ डिजिटल तकनीकों को भी समझेंगे।
कुल मिलाकर, SGSITS की इस लेक्चर सीरीज ने यह संदेश दिया कि रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के दौर में स्मार्ट ग्रिड, AI और डेटा आधारित तकनीकें भारत की बिजली व्यवस्था को अधिक सक्षम, किफायती और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।





