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Anganwadi केंद्रों के स्थानांतरण योजना को झटका, स्कूलों में जगह की कमी बनी बड़ी बाधा

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, जिसके तहत किराए के भवनों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाना है, अब जमीनी स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इस योजना का उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं को स्थायी और सुरक्षित सरकारी भवनों में संचालित करना था, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत सामने आ रही है।
जिले में 856 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक केवल 16 केंद्रों को ही स्थानांतरण के लिए उपयुक्त रूप से चिन्हित किया जा सका है। यह स्थिति नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच बड़े अंतर को उजागर करती है।
विभागीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि अधिकांश सरकारी स्कूलों में या तो पर्याप्त खाली कमरे नहीं हैं या फिर वे आंगनवाड़ी केंद्रों से काफी दूरी पर स्थित हैं। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र के एक किलोमीटर के दायरे में किए गए सर्वे के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि स्थानांतरण के लिए उपयुक्त भवनों की भारी कमी है।
इस कारण योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। जहां एक ओर सरकार बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस पूरे सर्वे की रिपोर्ट और उपलब्ध कमरों का विस्तृत विवरण भोपाल स्थित मुख्यालय को भेज दिया है। अब विभागीय स्तर पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, बिना उचित भवन और आधारभूत संरचना के आंगनवाड़ी केंद्रों का स्थानांतरण संभव नहीं है, क्योंकि इससे बच्चों और कार्यकर्ताओं दोनों को असुविधा हो सकती है। इसलिए योजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी पहलुओं पर पुनः विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्कूल भवनों की सीमित क्षमता और पहले से चल रही कक्षाओं के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। यदि अतिरिक्त संसाधन और बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं किया गया तो इस योजना का सफल क्रियान्वयन कठिन होगा।
कुल मिलाकर, आंगनवाड़ी केंद्रों के स्थानांतरण की यह योजना फिलहाल जमीनी हकीकत की चुनौतियों में उलझी हुई है, और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए व्यापक स्तर पर संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।





