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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में चल रहे अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने कहा कि इस संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र में हो रही गैर-कानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने में राज्य प्रशासन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने सुनवाई के दौरान बताया कि इस साल के पहले पांच महीनों में राज्य में बिना वैध रजिस्ट्रेशन के 250 से ज्यादा वाहन पकड़े गए हैं, जो अवैध खनन में संलिप्त पाए गए। कोर्ट ने इस आंकड़े को गंभीर चिंता का विषय बताया।
नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रहे इस तरह के अवैध खनन को लेकर कोर्ट ने कहा कि यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण नियमों का भी सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र घड़ियाल जैसे दुर्लभ जीवों के संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी पाया कि कई मामलों में पकड़े गए वाहनों को जब्त करने के बजाय केवल मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की ढीली कार्रवाई से अवैध खनन करने वालों को बढ़ावा मिलता है।
मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अपराधी इसे व्यावसायिक लागत के रूप में देखते हैं और कई अवैध गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अवैध खनन में शामिल वाहनों को सख्ती से जब्त (सीज) किया जाए और किसी भी स्थिति में उन्हें केवल जुर्माने पर न छोड़ा जाए। इसके साथ ही अदालत ने अधिकारियों को पूरे अवैध खनन नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि खनन माफिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत करना जरूरी है, ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अदालत के इस रुख के बाद राज्य प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह अवैध खनन पर सख्त और प्रभावी कदम उठाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल मामले की आगे की सुनवाई और राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





