मध्य प्रदेश

खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग पर फिलहाल रोक IIT टीम का निरीक्षण भी टला

Kavita2
12 Sept 2026 11:04 AM IST

उज्जैन : कंथल चौराहा से छतरी चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित खड़े हनुमान मंदिर के स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। नगर निगम ने मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के प्रस्ताव के साथ IIT टीम का प्रस्तावित निरीक्षण भी स्थगित कर दिया है। पिछले आठ दिनों से चर्चा में बने इस मामले में बढ़ते विरोध के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। हालांकि, प्रक्रिया पर रोक को स्थानांतरण का प्रस्ताव स्थायी रूप से रद्द किए जाने के समान नहीं माना जा सकता।

खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब सड़क चौड़ीकरण से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी असर डाल सकता है। नगर निगम चार बड़े धार्मिक ढांचों को हटाने की तैयारी कर रहा था। मौजूदा विवाद के बाद अधिकारियों को आशंका है कि दूसरे ढांचों को हटाने पर भी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल यह संभावित प्रभाव है। अन्य सभी धार्मिक ढांचों से संबंधित प्रस्ताव रद्द किए जाने या उन पर अलग आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

मंदिर स्थानांतरण को लेकर पुजारी महेश बैरागी की सहमति और उनकी शर्तें भी विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बैरागी ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने शर्तों के आधार पर सहमति दी थी। सार्वजनिक हुए पत्र में उन्होंने मंदिर परिसर की दुकानों को स्थानांतरित करने से परिवार की आजीविका प्रभावित होने का मुद्दा उठाया है। इससे मामला धार्मिक स्थल के स्थानांतरण के साथ उससे जुड़े आर्थिक हितों और लिखित आश्वासन तक पहुंच गया है।

इसी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नगर निगम ने पुजारी की लगभग सभी शर्तें स्वीकार करने पर सहमति जताई थी, लेकिन दुकानों के मुआवजे पर गतिरोध बना। दूसरी ओर, बैरागी का कहना है कि उनकी आठ शर्तों में केवल मंदिर के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज देने वाली शर्त पूरी हुई और सात शर्तें बाकी हैं। दोनों विवरणों में अंतर है। लिखित सहमति तथा शर्तों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने पर विवाद का यह पहलू समझा जा सकेगा।

मंदिर के ढांचे को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद विरोध बढ़ने की जानकारी सामने आई है। स्थानांतरण का उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण था, लेकिन धार्मिक महत्व और प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर सवालों ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया। ऐसे में निगम के सामने प्रस्तावित विकास कार्य तथा संबंधित पक्षों की आपत्तियों पर निर्णय लेने की स्थिति है। अभी नई स्थानांतरण तारीख या आगे की कार्रवाई का विस्तृत कार्यक्रम सामने नहीं आया है।

IIT टीम का निरीक्षण स्थगित होना इस मामले का दूसरा प्रमुख घटनाक्रम है। पहले प्रतिमा और उसके आधार की तकनीकी जांच की संभावना चर्चा में थी। अब प्रस्तावित निरीक्षण टलने से उससे मिलने वाला आकलन भी फिलहाल उपलब्ध नहीं होगा। हालांकि, किसी तकनीकी रिपोर्ट के बिना प्रतिमा की संरचना या स्थानांतरण की कठिनाइयों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। निरीक्षण कब होगा और किस संस्थान की टीम आएगी, इसकी नई जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

इससे पहले प्रकाशित रिपोर्टों में प्रतिमा को स्थानांतरित करने के कई प्रयास सफल नहीं होने की बात सामने आई थी। मंदिर के आसपास का ढांचा हटाए जाने के बावजूद प्रतिमा अपने स्थान पर बनी रहने से लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। कुछ श्रद्धालुओं ने इसे आस्था से जोड़कर देखा, जबकि प्रशासन तकनीकी परीक्षण पर विचार कर रहा था। श्रद्धालुओं की मान्यता और संरचना की वैज्ञानिक स्थिति अलग विषय हैं। प्रतिमा नहीं हट पाने की वजह किसी प्रमाणित तकनीकी निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगी।

सड़क चौड़ीकरण की योजना सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ाई जा रही थी। कंथल चौराहा और छतरी चौक के बीच स्थित धार्मिक स्थल के स्थानांतरण को इसी परियोजना से जोड़ा गया है। हालांकि, मंदिर संबंधी प्रक्रिया रोकने से सड़क परियोजना का कितना हिस्सा प्रभावित होगा, इसका विस्तृत विवरण नहीं है। इसलिए पूरे चौड़ीकरण कार्य को स्थायी रूप से बंद घोषित करना उपलब्ध जानकारी से आगे का निष्कर्ष होगा।

मौजूदा विवाद से अन्य धार्मिक ढांचों के संबंध में संवाद और प्रस्ताव की स्पष्टता का महत्व बढ़ गया है। संबंधित स्थल से जुड़े लोगों की आपत्तियां, स्थानांतरण की व्यवस्था और लिखित शर्तें निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। खड़े हनुमान मंदिर मामले में आजीविका और मुआवजे का प्रश्न सामने आने से यह स्पष्ट है कि विवाद के कई पहलू हैं। आगे निगम का औपचारिक पक्ष इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग और IIT टीम का प्रस्तावित निरीक्षण रुका हुआ है। नगर निगम की अगली कार्रवाई, पुजारी की शर्तों तथा संबंधित पक्षों के बीच सहमति पर नजर रहेगी। आठ दिनों से चर्चा में बने मामले ने सड़क चौड़ीकरण के अन्य प्रस्तावों के सामने भी संभावित चुनौती रखी है। अब किसी नए आदेश, तकनीकी निरीक्षण या लिखित समझौते से आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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