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Ratlam : पुलिया के नीचे पानी के पाइप में मिला नवजात, ग्रामीणों की सतर्कता से बची जान

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : रतलाम जिले में रविवार सुबह एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक नवजात शिशु को रिंग रोड के पास मथुरी गांव के नजदीक एक पुलिया के नीचे पानी के पाइप के अंदर लावारिस हालत में पाया गया। यह नवजात लड़का प्लास्टिक की थैली और बोरे में लपेटा हुआ था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन समय रहते मिली सूचना और ग्रामीणों की तत्परता के कारण उसकी जान बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब किसान अंबाराम पाटीदार सुबह लगभग 10 बजे अपने खेत की ओर जा रहे थे। वे घोड़ाखेड़ा रोड के पास पहुंचे ही थे कि उन्हें पुलिया के नीचे से किसी बच्चे के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन आवाज लगातार आने पर उन्होंने रुककर आसपास के क्षेत्र की गहन तलाशी शुरू की। जांच करने पर उन्हें एक ड्रेनेज पाइप के भीतर एक बोरा दिखाई दिया, जो संदिग्ध लग रहा था।
अंबाराम पाटीदार ने सावधानी से जब उस बोरे को बाहर निकाला और खोला, तो उसके अंदर एक प्लास्टिक की थैली में नवजात लड़का मिला। बच्चे की स्थिति देखकर वे हैरान रह गए, क्योंकि शिशु जीवित था लेकिन बहुत कमजोर दिखाई दे रहा था। बच्चे की गर्भनाल अभी तक कटी नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा था कि उसे जन्म के तुरंत बाद ही वहां छोड़ा गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए। गांव में इस घटना को लेकर अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बन गया। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना देने का निर्णय लिया। स्थानीय निवासी गिरधारी चौधरी ने डायल-112 पर कॉल कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई।
डीडी नगर थाना पुलिस कुछ ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गई और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने नवजात शिशु को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और बिना समय गंवाए उसे रतलाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया और उसे विशेष निगरानी में भर्ती कर लिया। डॉक्टरों ने बताया कि नवजात की हालत फिलहाल गंभीर लेकिन स्थिर है और उस पर लगातार नजर रखी जा रही है।
डॉक्टरों ने यह भी बताया कि बच्चे को जिस तरह से बोरे और प्लास्टिक में लपेटकर छोड़ा गया था, उससे उसकी हालत बिगड़ सकती थी। यदि उसे कुछ घंटे और उसी हालत में छोड़ दिया जाता, तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था। विशेषकर उस क्षेत्र में खुले में छोड़ने और संभावित बारिश या ठंड के कारण उसकी स्थिति और भी खराब हो सकती थी।
इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह समझ से परे है कि कोई व्यक्ति इतने छोटे और मासूम बच्चे को इस तरह लावारिस हालत में छोड़ सकता है। लोगों का कहना है कि नवजात की गर्भनाल कटी नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह घटना जन्म के तुरंत बाद की है। ऐसे में यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्चे को किसने और क्यों इस हालत में छोड़ा। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच कर रही है और ग्रामीणों से जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।
घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि मानवता को झकझोर देने वाली स्थिति है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सामने लाया जाए।
फिलहाल नवजात का इलाज रतलाम मेडिकल कॉलेज में जारी है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी देखभाल कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने भी कहा है कि बच्चे की हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और हर संभव इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह घटना न केवल रतलाम बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है और लोगों में आक्रोश तथा चिंता दोनों का माहौल है। पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले का खुलासा हो सकेगा कि आखिर किसने इस मासूम को इस हालत में छोड़ दिया।





