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मध्य प्रदेश
1800 साल पुरानी मूर्ति में दिखा दुर्लभ वाद्य यंत्र भारत के प्राचीन संगीत पर नई रोशनी
nidhi
26 Aug 2026 11:51 AM IST

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नया अध्याय 1800 साल पुरानी सरस्वती मूर्ति बनी चर्चा का केंद्र
नई दिल्ली: भारतीय कला और संगीत के इतिहास से जुड़ी एक दुर्लभ खोज ने इतिहासकारों और संगीत विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। मध्य प्रदेश के नीमच में मिली करीब 1800 साल पुरानी देवी सरस्वती की प्रतिमा अब चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस प्रतिमा में मां सरस्वती के हाथ में एक दुर्लभ वाद्य यंत्र दिखाई दे रहा है, जो प्राचीन भारतीय संगीत परंपरा की नई जानकारी दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतिमा दूसरी सदी यानी लगभग 1800 वर्ष पुरानी मानी जा रही है। इसमें देवी सरस्वती को सामान्य वीणा के बजाय एक अलग प्रकार के वाद्य यंत्र के साथ दर्शाया गया है, जिसे इतिहासकार वक्र-वीणा से जोड़कर देख रहे हैं।
प्राचीन संगीत परंपरा का मिला नया प्रमाण
भारतीय संस्कृति में देवी सरस्वती को ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। आमतौर पर उनकी प्रतिमाओं में उन्हें वीणा धारण किए हुए दिखाया जाता है, लेकिन इस प्राचीन प्रतिमा में दिख रहा वाद्य यंत्र संगीत के पुराने स्वरूपों पर नई रोशनी डाल रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि यह खोज उस दौर के संगीत वाद्ययंत्रों और कलाकारों की उन्नत समझ को सामने लाती है।
वक्र-वीणा ने खींचा विशेषज्ञों का ध्यान
इस प्रतिमा की सबसे खास बात इसमें मौजूद वाद्य यंत्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वाद्य यंत्र समुद्रगुप्त काल के सिक्कों पर दिखाई देने वाले वाद्य से मिलता-जुलता है। यह संकेत देता है कि प्राचीन भारत में संगीत की परंपरा काफी विकसित थी और अलग-अलग प्रकार के वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता था।
मालव काल से जुड़ा है इतिहास
यह प्रतिमा मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी मानी जा रही है। मालव क्षेत्र प्राचीन समय से ही कला, साहित्य और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पुरातत्व विशेषज्ञ इस प्रतिमा को भारतीय कला इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर मान रहे हैं और इसके अध्ययन से प्राचीन समाज की सांस्कृतिक गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।
सरस्वती प्रतिमा से खुलेंगे संगीत के राज
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मूर्ति केवल धार्मिक महत्व की नहीं है, बल्कि भारतीय संगीत के विकास को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है। प्राचीन मूर्तियों और शिल्पकला में दिखाए गए वाद्ययंत्रों के आधार पर उस समय की संगीत शैली, तकनीक और कलाकारों की जानकारी मिलती है।
भारतीय विरासत के संरक्षण की जरूरत
ऐसी ऐतिहासिक खोजें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सामने लाती हैं। पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है, ताकि देश के प्राचीन ज्ञान और कला परंपराओं को समझा जा सके। 1800 साल पुरानी सरस्वती प्रतिमा ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत की धरती के नीचे इतिहास के कई अनमोल अध्याय छिपे हुए हैं।
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