मध्य प्रदेश

पांच बच्चियों से दुष्कर्म: भोपाल कोर्ट ने बुजुर्ग को सुनाई ताउम्र जेल की सजा

nidhi
28 Oct 2026 7:51 AM IST
पांच बच्चियों से दुष्कर्म: भोपाल कोर्ट ने बुजुर्ग को सुनाई ताउम्र जेल की सजा
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भोपाल में बच्चियों से दुष्कर्म के दोषी को सजा
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पांच नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने 78 वर्षीय अब्दुल अय्यूब उर्फ प्यारे मियां को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने विभिन्न धाराओं में उसे दस अलग-अलग आजीवन कारावास की सजाएं दी हैं। इनमें आठ सजाएं शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की हैं, जबकि दो अन्य आजीवन कारावास की हैं। दोषी पर कुल 77 लाख 64 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
मंगलवार, 27 अक्टूबर को विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामले में प्यारे मियां की सहयोगी राबिया बी को भी दोषी ठहराते हुए 20 साल के कारावास की सजा दी गई है। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक पीएन सिंह राजपूत ने पैरवी की। करीब छह वर्ष पहले सामने आए इस मामले में पुलिस जांच और न्यायालय में चली सुनवाई के बाद दोषसिद्धि तथा सजा का निर्णय आया है।
शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल की सजा
अदालत के फैसले का प्रमुख बिंदु आठ सजाओं में शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास का प्रावधान है। इसका अर्थ है कि संबंधित सजाएं दोषी के शेष जीवनकाल के लिए सुनाई गई हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसलिए दस सजाओं को जोड़कर लगातार दस अलग-अलग जीवनकाल की सजा समझना सही नहीं होगा। दोषी पर लगाया गया 77.64 लाख रुपये का जुर्माना भी फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस राशि के पीड़िताओं के बीच वितरण या प्रत्येक धारा के तहत निर्धारित हिस्से का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए जुर्माने की पूरी रकम किसी विशेष मद में दिए जाने का दावा नहीं किया जा सकता। स्पष्ट जानकारी यही है कि अदालत ने कारावास के साथ इतनी कुल जुर्माना राशि भी निर्धारित की है।
नौकरी का भरोसा देकर बुलाने का मामला
अभियोजन के अनुसार, प्यारे मियां बच्चियों को अपने घर में दस हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बुलाता था। इसके बाद उनका यौन शोषण किया जाता था। अभियोजन ने बताया कि यह घटनाक्रम वर्ष 2014 से चल रहा था। उसकी सहयोगी राबिया बी की भूमिका बच्चियों को उसके पास पहुंचाने में बताई गई। अदालत ने साक्ष्यों और आरोपों पर विचार करने के बाद दोनों को संबंधित अपराधों में सजा सुनाई है। इस मामले में नौकरी का प्रस्ताव बच्चियों तक पहुंच बनाने का माध्यम बना। अभियोजन के विवरण में अलग-अलग समय पर शोषण किए जाने की बात सामने आई। मुकदमे में बच्चियों के साथ हुए अपराध और सहयोगी की भूमिका की जांच की गई। उपलब्ध समाचार विवरणों में हर घटना की अलग तारीख और प्रत्येक आरोप से संबंधित साक्ष्य का पूरा ब्यौरा नहीं है। इसलिए सभी घटनाओं को एक ही अवसर या एक ही स्थान तक सीमित बताना उचित नहीं होगा।
जुलाई 2020 में सामने आया था प्रकरण
मामले का खुलासा जुलाई 2020 में हुआ था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को रात में पांच बच्चियां मिली थीं। उनकी काउंसलिंग के दौरान यौन शोषण की जानकारी सामने आई। बच्चियों ने बताया था कि उन्हें जन्मदिन मनाने के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बच्चियों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनके निवास, परिवार, स्कूल या अन्य पहचान उजागर करने वाले विवरण शामिल नहीं किए जा रहे हैं।
पीटीआई के मुताबिक, काउंसलिंग के दौरान एक पीड़िता ने उसे बुलाए जाने और उसके साथ अपराध किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद अन्य बच्चियों ने भी शोषण के बारे में बताया। पुलिस ने जांच के दौरान प्यारे मियां को गिरफ्तार किया और उसके तथा सहयोगियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ी। इसी मामले में अब अदालत ने आरोप सिद्ध होने पर सजा सुनाई है। फैसला केवल आरोप दर्ज होने की स्थिति से आगे दोषसिद्धि का चरण है।
सहयोगी को सजा, पांच अन्य बरी
पीपुल्स अपडेट की रिपोर्ट के अनुसार, राबिया बी को 20 साल के कठोर कारावास के साथ 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। उसी रिपोर्ट में पांच अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे स्पष्ट है कि मामले में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया गया। सभी के लिए एक जैसा निष्कर्ष या समान सजा नहीं दी गई। न्यायिक हिरासत में जबलपुर जेल में बंद प्यारे मियां को सुरक्षा के बीच भोपाल की अदालत में पेश किया गया था। वह पहले समाचार पत्र संचालन से जुड़ा रहा है। हालांकि, इस फैसले का आधार उसका पेशा या उम्र नहीं, बल्कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मामले में अपराध सिद्ध होना है। पांच बच्चियों के खिलाफ गंभीर यौन अपराधों से जुड़े इस प्रकरण में अदालत ने शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास और भारी जुर्माने का आदेश दिया है।
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