मध्य प्रदेश

दमोह में 14 साल की बच्ची से दुष्कर्म,आरोपी गिरफ्तार

Rajeshwari Nishad
31 Oct 2026 3:57 PM IST
दमोह में 14 साल की बच्ची से दुष्कर्म,आरोपी गिरफ्तार
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दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले से नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को महज 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। नाबालिग से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना का आरोप सामने आने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस मामले में आरोपी की पहचान, घटना की सटीक तारीख, थाना क्षेत्र और प्राथमिकी में दर्ज धाराओं का आधिकारिक विवरण अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन तथ्यों की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर होना आवश्यक है।
24 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले को प्राथमिकता दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी की तलाश शुरू की और 24 घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती जांच के दौरान पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य संभावित साक्ष्यों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाती है। इन साक्ष्यों की भूमिका आगे की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी किए जाने के बाद अब मामले की जांच में घटना की परिस्थितियों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि की जाएगी। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपी के विरुद्ध दोष का निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
हटा थाना क्षेत्र का मामला, आरोपी की पहचान सामने आई
30 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने आरोपी की पहचान 27 वर्षीय फैजान खान, पिता फरीद खान, निवासी रामकवि वार्ड के रूप में की है। पीड़िता की उम्र 14 वर्ष बताई गई है।
हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
28 अक्टूबर को हुई थी कथित घटना
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, 28 अक्टूबर को आरोपी फैजान खान नाबालिग को कथित तौर पर जबरन अपनी स्कूटी पर बैठाकर ले गया था। आरोप है कि वह उसे ईदगाह के पास एक सुनसान स्थान पर ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बारे में किसी को बताने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी।
जब नाबालिग काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। घर लौटने के बाद उसने परिवार को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।
डेढ़ साल से परेशान करने का भी आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी पिछले करीब डेढ़ वर्ष से उसे परेशान कर रहा था। उसने आरोपी पर पहले भी यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।
पुलिस इन आरोपों को भी जांच में शामिल कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित रूप से पहले हुई घटनाओं की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को थी या नहीं और धमकी देने के आरोप से जुड़े कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।
इस तरह के मामलों में पीड़िता का बयान, उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाण न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, किसी भी आरोप की सत्यता का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए देश में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट लागू है। यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।
इस कानून के अंतर्गत पीड़ित बच्चों की पहचान गोपनीय रखने, उनके बयान संवेदनशील तरीके से दर्ज करने और न्यायिक प्रक्रिया में उनके हितों की रक्षा करने के विशेष प्रावधान हैं।
दमोह के इस मामले में पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के साथ अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं। हालांकि, प्राथमिकी में दर्ज सभी विशिष्ट धाराओं का विवरण उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है।
नाबालिग की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की रिपोर्टिंग करते समय उनकी निजता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पीड़िता का नाम, तस्वीर, पता, स्कूल या ऐसी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके।
यह सावधानी केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पीड़ित बच्चे की गरिमा और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में परिवार और समाज की जिम्मेदारी होती है कि पीड़ित बच्चे को
मानसिक
और भावनात्मक सहयोग दिया जाए। किसी भी तरह के सामाजिक दबाव, दोषारोपण या अपमानजनक व्यवहार से बचना जरूरी है।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगी कार्रवाई?
आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायालय में पेशी के बाद अब मामले में आगे की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों का संकलन करना होगा।
यदि जांच में अन्य घटनाओं या अतिरिक्त अपराधों से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार शामिल किया जा सकता है।
इस मामले में आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है, लेकिन किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार न्यायालय को है। इसलिए पुलिस जांच पूरी होने और अदालत का निर्णय आने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
दमोह की इस घटना ने नाबालिगों की सुरक्षा और यौन अपराधों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई के महत्व को एक बार फिर सामने रखा है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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