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मध्य प्रदेश
बालाघाट दौरे से पहले राहुल गांधी पर राजेंद्र शुक्ला का हमला
Ratna Netam
30 Sept 2026 8:10 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बुधवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित बालाघाट दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बच्चों की मौत के मामले में समय पर संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अब “राजनीतिक फायदा” उठाने के लिए प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट जिले के उन आदिवासी बहुल क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं, जहां पिछले कुछ महीनों में कई बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
राजेंद्र शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी के दौरे के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि घटना के कई दिनों बाद विपक्ष के नेता का प्रभावित क्षेत्र में पहुंचना उनकी मंशा पर सवाल खड़ा करता है। शुक्ला ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता इस तरह के दौरे राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने और सरकार पर हमला करने के लिए करते हैं। यह उपमुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है, जिस पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
राहुल गांधी का प्रस्तावित बालाघाट दौरा जिले के बैहर और बिरसा क्षेत्र में रहने वाले बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के बच्चों की मौतों से जुड़ा है। अलग-अलग रिपोर्टों में जून-जुलाई से अब तक 30 से अधिक बच्चों की मौत की बात सामने आई है। मौतों की वास्तविक संख्या और प्रत्येक बच्चे की मृत्यु के चिकित्सा कारणों को लेकर जांच और आधिकारिक आकलन की प्रक्रिया जारी है।
राहुल गांधी इससे पहले 17 सितंबर को भी सोशल मीडिया के जरिए बालाघाट का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने उस समय बच्चों की मौतों को बीमारी, कुपोषण, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जोड़ते हुए मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग भी की थी। इसलिए यह कहना कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर पहले कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी, उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
राजेंद्र शुक्ला ने अपनी ओर से दावा किया कि राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण, ORS और जिंक दवाओं के वितरण में पूर्ण कवरेज का लक्ष्य हासिल किया गया है। इसके अलावा चार चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर तैनात किए गए हैं और ASHA कार्यकर्ताओं की संख्या भी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग भी नियमित समीक्षा कर रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रभावित गांव दूरदराज और पहले नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में आते हैं, जिसके कारण लंबे समय तक अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने दावा किया कि अब क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक पहुंच को मजबूत कर रही है। शुक्ला के मुताबिक दो ब्लॉक और करीब 50 गांवों में सामने आई कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अब नियंत्रण में लाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। शुक्ला ने बताया कि राज्य में 3,100 से अधिक बॉन्डेड डॉक्टरों की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पोस्टिंग की गई है, जिनमें 2,600 से ज्यादा डॉक्टर ज्वाइन कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मुफ्त जांच, दवाओं, शुरुआती इलाज और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बालाघाट में बच्चों की मौत के कारणों को लेकर भी तस्वीर एक समान नहीं है। केंद्र की अगुवाई में हुई जांच में अब तक किसी एक बीमारी या एक ही रोगजनक को सभी मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं पाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित बच्चों में खसरा, मलेरिया, सह-संक्रमण, सांस की परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी अलग-अलग स्थितियां सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी, मेडिकल स्क्रीनिंग, टीकाकरण और इलाज की गतिविधियां बढ़ाई हैं।
मामला न्यायिक जांच के दायरे में भी पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बच्चों की मौत से जुड़ी जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में प्रभावित क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं, अस्पताल की क्षमता, पेयजल और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने संबंधित विभागों और प्रशासन से रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
राहुल गांधी 1 अक्टूबर को प्रभावित परिवारों से मिलने वाले हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक वह पीड़ित परिवारों से सीधे बातचीत कर बच्चों की मौत की परिस्थितियों और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में जानकारी लेंगे। उनके दौरे को लेकर कांग्रेस सरकार पर जवाबदेही तय करने की मांग उठा रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक अवसरवाद बता रही है।
इस पूरे मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी प्रतिक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि सरकार ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं और विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
बालाघाट के प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, सुरक्षित पेयजल और बीमारी की समय पर पहचान से जुड़ा है। राहुल गांधी के दौरे और राजेंद्र शुक्ला की आलोचना के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और सरकारी रिकॉर्ड बच्चों की मौतों के वास्तविक कारणों तथा प्रशासनिक प्रतिक्रिया के बारे में क्या तस्वीर सामने रखते हैं।
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