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मध्य प्रदेश में फिर सक्रिय होगा बारिश का दौर, अगले 4 दिन कई जिलों में भारी बारिश के आसार

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने के संकेत हैं। बुधवार सुबह राजधानी भोपाल में आसमान पर बादल छाए रहे और मौसम में बदलाव दिखाई दिया। बादलों की मौजूदगी के कारण शहर में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है।
प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन करीब 34.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश का लगभग 91.5 प्रतिशत बताई जा रही है। ऐसे में मानसून के इस आखिरी दौर से प्रदेश के बारिश के आंकड़े में और सुधार होने की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में पूर्वानुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो राज्य सामान्य वर्षा के आंकड़े के और करीब पहुंच सकता है।
भोपाल में सुबह से छाए बादल
राजधानी भोपाल में बुधवार सुबह से ही मौसम बदला हुआ दिखाई दिया। आसमान में बादल छाए रहने से धूप का असर कम रहा। मौसम की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शहर में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है।
पिछले कुछ समय से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली के कारण एक बार फिर मध्य प्रदेश में बारिश बढ़ने के संकेत मिले हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक इस सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बादल और बारिश का दौर जारी रह सकता है।
अगले चार दिन अहम
मध्य प्रदेश के लिए अगले चार दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।
मौसम प्रणाली जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, बारिश का क्षेत्र भी बदल सकता है। इसके कारण प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
लोगों को स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले मौसम अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है, खासकर उन इलाकों में जहां तेज बारिश की संभावना जताई जाए।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम
बारिश के नए दौर के पीछे बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके और मजबूत होने की संभावना है। यह सिस्टम पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए मध्य तथा पूर्वी भारत के कई राज्यों के मौसम को प्रभावित कर सकता है।
इसके प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
मौसम प्रणाली के रास्ते और उसकी तीव्रता के आधार पर मध्य प्रदेश में बारिश की मात्रा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है।
अब तक 34.2 इंच बारिश
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन करीब 34.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश का लगभग 91.5 प्रतिशत है।
यानी राज्य अभी सामान्य मौसमी वर्षा के आंकड़े से कुछ पीछे है। मानसून के अंतिम चरण में बनने वाला यह बारिश का दौर इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अगर आने वाले दिनों में प्रदेश के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश होती है तो राज्य के कुल वर्षा प्रतिशत में तेजी से सुधार हो सकता है।
बारिश का आखिरी दौर बढ़ा सकता है आंकड़ा
सितंबर के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश मानसून के कुल आंकड़े को प्रभावित कर सकती है। इस समय कई क्षेत्रों में मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने लगती है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बनने वाली सक्रिय मौसम प्रणालियां बारिश का एक और दौर लेकर आ सकती हैं।
मध्य प्रदेश के लिए मौजूदा सिस्टम भी इसी लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब तक सामान्य बारिश का 91.5 प्रतिशत पानी मिलने के बाद अगर इस दौर में पर्याप्त बारिश होती है तो प्रदेश सामान्य वर्षा के आंकड़े के और करीब पहुंच सकता है।
हालांकि बारिश का वास्तविक वितरण सिस्टम की दिशा और ताकत पर निर्भर करेगा।
किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मौसम
मानसून के अंतिम चरण की बारिश कृषि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है। खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति के अनुसार बारिश का असर अलग-अलग हो सकता है।
जहां मिट्टी में नमी की जरूरत है, वहां नियंत्रित बारिश से फायदा हो सकता है। वहीं अत्यधिक या लगातार तेज बारिश होने पर खेतों में पानी भरने और तैयार फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है।
इसलिए किसानों के लिए जिलेवार मौसम पूर्वानुमान और स्थानीय कृषि सलाह पर नजर रखना जरूरी होगा।
तेज बारिश में बढ़ सकती हैं परेशानियां
भारी बारिश वाले इलाकों में निचले स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीण इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। तेज बारिश के समय उफनते नाले या जलमग्न रास्ते पार करने से बचना चाहिए।
मौसम विभाग की ओर से किसी क्षेत्र के लिए चेतावनी जारी होने पर स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
मध्य भारत के कई राज्यों पर असर
बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा सिस्टम केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ मध्य भारत के दूसरे हिस्सों में भी बारिश होने की संभावना है।
सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ मौसम में बदलाव का दायरा बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश में इसके प्रभाव से बादल छाने, हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।
मौसम के अगले अपडेट पर नजर
बुधवार सुबह भोपाल में छाए बादलों के साथ प्रदेश में बारिश के नए दौर की आहट दिखाई देने लगी है। अगले चार दिनों में कई जिलों में बारिश की संभावना के कारण मौसम विभाग के आगामी अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।
प्रदेश में अब तक 34.2 इंच यानी सामान्य का करीब 91.5 प्रतिशत पानी बरस चुका है। अब बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम से होने वाली बारिश इस आंकड़े को और बढ़ा सकती है। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और तीव्रता यह तय करेगी कि मध्य प्रदेश के किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बारिश होगी।





