मध्य प्रदेश

DU छात्र की मौत पर परिवार से मिले राहुल गांधी

Ratna Netam
19 Sept 2026 9:30 PM IST
DU छात्र की मौत पर परिवार से मिले राहुल गांधी
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इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय छात्र अर्पित जाज के परिवार से मुलाकात की। परिवार ने राहुल गांधी के सामने छात्र आवास की सुरक्षा, महंगे पीजी और कथित अवैध निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत है।मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले अर्पित दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। 6 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से उनकी मौत हो गई थी। इस हादसे में कुल सात लोगों की जान गई, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। हादसे के बाद दिल्ली में निजी पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।अर्पित के परिवार ने राहुल गांधी से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि यह हादसा एक गैर-जिम्मेदार व्यवस्था का नतीजा था। परिवार ने सवाल किया कि अर्पित की गलती क्या थी, वह तो सिर्फ पढ़ाई करने के लिए दिल्ली में रह रहा था।परिवार का कहना था कि देशभर के मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और करियर के लिए दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भेजते हैं। इसके लिए वे अपनी आर्थिक क्षमता से बढ़कर खर्च भी करते हैं, लेकिन अगर उनके बच्चों को सुरक्षित आवास ही न मिले तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
परिवार ने कहा- बहुत महंगे हैं PG
राहुल गांधी के साथ बातचीत के दौरान अर्पित के परिवार ने दिल्ली में छात्रों के रहने की समस्या को प्रमुखता से उठाया।परिवार के सदस्य ने कहा कि पीजी का किराया काफी अधिक है। इसके बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए उन्हें बड़े शहरों में भेजते हैं। माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और अपना करियर बनाएं, लेकिन रहने की जगह सुरक्षित है या नहीं, इसकी जानकारी आम परिवार के लिए जुटाना आसान नहीं होता।सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी और किराए के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद इस इलाके में छात्र आवास की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर जांच तेज हुई है।
'हमें नहीं पता था दो मंजिला इमारत को पांच मंजिला बनाया गया'
अर्पित के परिवार ने कार्यक्रम में दावा किया कि जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, वह देखने में सामान्य और ठीक लगती थी। परिवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि इमारत के निर्माण को लेकर नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।परिवार ने कहा कि अगर नियमित वैधानिक ऑडिट और सुरक्षा जांच की व्यवस्था होती तो ऐसी दुर्घटना को रोका जा सकता था।इस मामले में पुलिस जांच से भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार इमारत के मालिक को केवल दो मंजिलों के निर्माण की अनुमति थी, लेकिन बाद में तीन अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं। हादसे से पहले बेसमेंट में भी निर्माण कार्य चल रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि निर्माण गतिविधियों ने इमारत की संरचनात्मक मजबूती को किस हद तक प्रभावित किया।
बेसमेंट में चल रहा था काम
पुलिस जांच में एक जीवित बचे छात्र का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक छात्र ने पुलिस को बताया कि हादसे से करीब 10 से 12 दिन पहले बेसमेंट में निर्माण कार्य शुरू हुआ था।उसका आरोप है कि छात्रों ने लोहे की छड़ों को काटे जाने और निर्माण से जुड़े शोर को लेकर पीजी संचालकों के सामने चिंता जताई थी।पुलिस इस बयान के साथ लीज दस्तावेजों और दूसरे साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में पीजी संचालकों, भवन मालिक और निर्माण से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।एक अन्य जांच रिपोर्ट में बेसमेंट में पानी जमा होने और निर्माण गतिविधियों से इमारत कमजोर होने की बात अधिकारियों के हवाले से सामने आई थी।
राहुल गांधी बोले- छात्रों की उम्मीद वापस लौटे
परिवार की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने कार्यक्रम में छात्रों के बीच भरोसा और उम्मीद वापस लाने की जरूरत पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह होना चाहिए कि विद्यार्थियों के मन में शिक्षा और व्यवस्था को लेकर जो उम्मीद कमजोर हुई है, वह फिर मजबूत हो। उन्होंने छात्रों की जिज्ञासा, ईमानदारी, करुणा और आपसी प्रेम जैसी खूबियों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा देश के भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।राहुल गांधी ने छात्रों को व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने और सवाल उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।उनका यह बयान ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान आया, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से संबंधित अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की गई।
6 सितंबर को हुआ था बड़ा हादसा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। यह इमारत छात्रों के लिए निजी हॉस्टल/पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही थी।घटना के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। NDRF और दूसरी एजेंसियों का सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 27 घंटे तक चला। हादसे में सात लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।शुरुआती बचाव अभियान के दौरान मलबे से कई लोगों को निकालकर AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया था। इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित थी और उसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे।
अर्पित बड़े शहर में पढ़कर पूरा करना चाहता था सपना
अर्पित जाज के परिवार ने हादसे के बाद बताया था कि वह बड़े सपनों के साथ दिल्ली पढ़ने गया था। परिवार के मुताबिक वह मेहनत कर अपना भविष्य बनाना चाहता था।उसके पिता ने हादसे के बाद कहा था कि अर्पित बड़े शहर में पढ़ना चाहता था और परिवार ने उसके सपनों को पूरा करने के लिए उसे दिल्ली भेजा था।लेकिन 6 सितंबर के हादसे ने परिवार की जिंदगी बदल दी। अब परिवार छात्र सुरक्षा और निजी पीजी की जवाबदेही का सवाल उठा रहा है।
हाई कोर्ट तक पहुंचा सुरक्षा का मामला
सत्य निकेतन हादसा अब दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत के सामने निजी हॉस्टल और पीजी की सुरक्षा तथा पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए छात्र हॉस्टलों की समस्या और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर निर्धारित की गई है।अदालत की टिप्पणियों के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि दिल्ली जैसे शहरों में हजारों विद्यार्थियों को आवास उपलब्ध कराने वाले निजी पीजी और हॉस्टलों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच किस तरह की जाए।
MCD अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
हादसे के बाद नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक अनधिकृत निर्माण की अनदेखी के आरोप में MCD के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।तीन इंजीनियरों के निलंबन की जानकारी सामने आई, जबकि इससे पहले चार अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई थी।पुलिस जांच में भवन मालिक, पीजी संचालक और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
छात्रों के लिए सुरक्षित आवास बना बड़ा सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर उस समस्या को सामने ला दिया है जिसका सामना बड़े शहरों में पढ़ाई करने वाले हजारों विद्यार्थी करते हैं।दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र पढ़ने पहुंचते हैं। विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में सभी विद्यार्थियों को जगह नहीं मिल पाने के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी, हॉस्टल और किराए के कमरों पर निर्भर रहते हैं।ऐसे में किराए के साथ भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और अधिकृत निर्माण जैसी चीजें भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।अर्पित के परिवार ने राहुल गांधी के सामने इसी समस्या को उठाते हुए नियमित सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता बताई।
हादसे की जांच जारी
सत्य निकेतन मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अतिरिक्त निर्माण और बेसमेंट में चल रहे काम के लिए कौन-कौन जिम्मेदार था।जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पेश होने के बाद ही व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी अंतिम रूप से तय होगी।फिलहाल अर्पित जाज के परिवार की राहुल गांधी से मुलाकात ने इस हादसे को एक बार फिर छात्र सुरक्षा और किफायती आवास की बहस के केंद्र में ला दिया है। परिवार का सवाल है कि बेहतर भविष्य की तलाश में घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित रहने की जगह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।सत्य निकेतन की त्रासदी के बाद यह सवाल केवल एक इमारत तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली जैसे शिक्षा केंद्रों में निजी पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा, निर्माण नियमों के पालन और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
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