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Indore जल त्रासदी पर सवाल कायम, छह महीने बाद भी नहीं आई रिपोर्ट

Indore इंदौर : मध्य प्रदेश के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। दूषित पानी की वजह से हुई मौतों और लोगों के बीमार पड़ने की घटना में गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि आखिर पानी दूषित कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
सोमवार को इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायिक आयोग की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश नहीं की जा सकी। रिपोर्ट नहीं आने पर अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और इसके बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुखता से उठा कि आखिर छह महीने का समय बीत जाने के बाद भी जांच किस स्थिति में है। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि इतने लंबे समय के बाद भी आयोग किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका है। वहीं सुनवाई के दौरान न्यायिक आयोग की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि मौजूद था और न ही रिपोर्ट में हो रही देरी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड ने पूरे इंदौर शहर को झकझोर दिया था। दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे और कई लोगों की मौत भी हुई थी। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया था, ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके।
आयोग को यह जांच करनी थी कि पानी में गड़बड़ी किस वजह से हुई, क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव भी देने थे।
हालांकि, अब तक आयोग की रिपोर्ट सामने नहीं आने से पीड़ित परिवारों और प्रभावित लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि घटना के दोषियों की पहचान जल्द होनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
मामले में हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और जल्द ही रिपोर्ट अदालत के सामने प्रस्तुत की जाएगी। कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
प्रशासन की ओर से भी लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। लेकिन छह महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं आने से जांच की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भागीरथपुरा कांड केवल एक स्थानीय घटना नहीं थी, बल्कि इसने शहरों में पेयजल व्यवस्था, पाइपलाइन रखरखाव और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के अगले आदेश और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।





