मध्य प्रदेश

TI हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

Kavita2
4 Nov 2026 10:30 AM IST
TI हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पैर में लगी गोली
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देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी गोस्वामी की ट्रक से कुचलकर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वारदात के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी मिनी ट्रक चालक गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत को देवास पुलिस ने मंगलवार को आलीराजपुर जिले से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को खातेगांव लाया जा रहा था। इसी दौरान बरोठा थाना क्षेत्र में पुलिस वाहन का टायर पंचर होने पर आरोपी ने कथित रूप से पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और एक सब-इंस्पेक्टर की पिस्तौल छीनने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को भागने से रोकने के लिए गोली चलाई गई, जो उसके दाहिने पैर में लगी। घायल आरोपी को इलाज के लिए देवास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस घटना की जानकारी देते हुए देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि खातेगांव थाना प्रभारी की मौत के मामले में फरार आरोपी की तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें लगाई गई थीं। लगातार तलाश के बाद पुलिस को गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत के आलीराजपुर जिले में छिपे होने की जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे चंद्रशेखर आजाद नगर क्षेत्र से पकड़ लिया।

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम उसे देवास जिले के खातेगांव लेकर रवाना हुई। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में बरोठा थाना क्षेत्र के आसपास वाहन का एक टायर पंचर हो गया। वाहन रुकने के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की।

पुलिस का दावा है कि गजेंद्र ने एक सब-इंस्पेक्टर की पिस्तौल छीनने का प्रयास किया। इस दौरान आरोपी और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने और आरोपी को भागने से रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई। गोली आरोपी के दाहिने पैर में लगी, जिससे वह घायल हो गया।

घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। पुलिस की ओर से इस घटनाक्रम को हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान हुई मुठभेड़ बताया गया है। हालांकि, हथियार छीनने और भागने के प्रयास से संबंधित परिस्थितियां पुलिस के आधिकारिक बयान पर आधारित हैं।

दरअसल, यह पूरा मामला खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी गोस्वामी की मौत से जुड़ा है। सोमवार, 2 नवंबर की तड़के अवैध शराब के परिवहन की सूचना पर थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ इंदौर-बैतूल मार्ग पर पहुंचे थे। पुलिस को जानकारी मिली थी कि एक वाहन में अवैध शराब भरकर गुजरात की ओर ले जाई जा रही है।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने संदिग्ध वाहन को रोककर जांच करने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, वाहन चालक को नीचे उतरने के लिए कहा गया था। इसी दौरान चालक ने कथित तौर पर वाहन आगे बढ़ा दिया और थाना प्रभारी दिलीप पुरी उसकी चपेट में आ गए।

बताया गया है कि वाहन का पिछला पहिया थाना प्रभारी के ऊपर से गुजर गया। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। ड्यूटी के दौरान थाना प्रभारी की मौत से पुलिस विभाग में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस विभाग की ओर से विशेष जांच दल गठित कर अलग-अलग स्थानों पर आरोपियों की तलाश की गई।

जांच के दौरान पुलिस के सामने अवैध शराब के अंतरराज्यीय परिवहन से जुड़े एक कथित नेटवर्क की जानकारी भी सामने आई। पुलिस ने मामले में कुछ अन्य लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शराब तस्करी के कथित मुख्य संचालक राहुल जायसवाल, उसके सहयोगी विजय राव और वाहन उपलब्ध कराने वाले केरम सिंह को गिरफ्तार किया था। अब मुख्य आरोपी चालक गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत की गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, गजेंद्र लंबे समय से अवैध शराब के परिवहन से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ पूर्व में भी शराब परिवहन से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पुराने मामलों की स्थिति और उनमें दोषसिद्धि से संबंधित विवरण की अलग से पुष्टि आवश्यक है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना वाले दिन वाहन में शराब कहां से भरी गई थी और उसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा अवैध शराब के परिवहन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

मध्य प्रदेश से गुजरात की ओर अवैध शराब के परिवहन की आशंका को लेकर पुलिस पहले से सतर्क रहती है। गुजरात में शराबबंदी लागू होने के कारण पड़ोसी राज्यों से अवैध शराब की तस्करी एक गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौती बनी हुई है। ऐसे मामलों में शराब के परिवहन, भंडारण और आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की पहचान करना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होता है।

खातेगांव थाना प्रभारी की मौत के मामले में भी जांच का दायरा केवल वाहन चालक तक सीमित नहीं है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि अवैध शराब की कथित खेप भेजने और परिवहन कराने में किन लोगों की भूमिका थी।

इस बीच आरोपी गजेंद्र के पुलिस हिरासत से भागने की कथित कोशिश और गोली लगने की घटना भी चर्चा में है। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया था। ऐसे में उसे रोकने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई के दौरान आरोपी के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। हिरासत के दौरान हुई गोलीबारी की परिस्थितियों का परीक्षण भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना आवश्यक है।

देवास पुलिस के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि इसमें एक थाना प्रभारी की ड्यूटी के दौरान जान गई है। पुलिस अधिकारी की मौत के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे कथित तस्करी नेटवर्क का खुलासा करना जांच का प्रमुख उद्देश्य बना हुआ है।

ताजा जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी की मौत के समय वाहन में गजेंद्र के साथ मौजूद बताए गए उसके सहयोगी धीरज को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। धीरज के संबंध में भी पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल होने की खबर सामने आई है।

फिलहाल मुख्य आरोपी गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत अस्पताल में उपचाराधीन है। पुलिस पूरे मामले में आगे की जांच कर रही है। अब जांच के बाद स्पष्ट होगा कि थाना प्रभारी की मौत, अवैध शराब के परिवहन और हिरासत से भागने की कथित कोशिश से जुड़े घटनाक्रम में आरोपियों की वास्तविक भूमिका क्या रही।

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