मध्य प्रदेश

प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025: बोनस अंक विवाद पर हाईकोर्ट ने ESB को नोटिस जारी

Kavita2
16 April 2026 10:53 AM IST
प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025: बोनस अंक विवाद पर हाईकोर्ट ने ESB को नोटिस जारी
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित प्रिंसिपल बेंच ने बुधवार को प्राइमरी टीचर सिलेक्शन एग्जाम 2025 में दिए गए बोनस मार्क्स को लेकर एम्प्लॉइज सिलेक्शन बोर्ड (ESB) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह कार्रवाई उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद की, जिनमें चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और गलत तरीके से बोनस अंक दिए जाने को चुनौती दी गई थी।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी ने की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में कई अभ्यर्थियों को बिना वैध योग्यता के 5 प्रतिशत बोनस अंक दिए गए, जिससे मेरिट लिस्ट प्रभावित हुई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि विवादित मेरिट लिस्ट अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

कोर्ट ने एम्प्लॉइज सिलेक्शन बोर्ड और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए और गलत तरीके से दिए गए बोनस अंकों को रद्द किया जाए।

याचिकाकर्ता सोनम अगरैया और दो अन्य की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विशाल बघेल ने अदालत में तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन के क्लॉज 7.7 के अनुसार 5 प्रतिशत बोनस अंक केवल उन उम्मीदवारों को दिए जाने थे, जिनके पास रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (RCI) से मान्यता प्राप्त स्पेशल एजुकेशन डिप्लोमा है।

हालांकि, चयन सूची के विश्लेषण में यह सामने आया है कि लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने इस श्रेणी का गलत दावा कर बोनस अंक प्राप्त किए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह संख्या संदिग्ध है क्योंकि RCI के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार पूरे मध्य प्रदेश में केवल 2,194 व्यक्ति और 3,077 प्रोफेशनल ही पोर्टल पर पंजीकृत हैं।

इन आंकड़ों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि इतने बड़े पैमाने पर स्पेशल एजुकेशन सर्टिफिकेट होने का दावा वास्तविक नहीं लगता और यह संभावित गड़बड़ी या धोखाधड़ी की ओर संकेत करता है।

इसके अलावा, डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) ने भी जनवरी 2026 में विभाग को इस मामले में अलर्ट किया था कि इस योग्यता का दावा करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है, जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक मेरिट लिस्ट पर अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा है। यह मामला अब भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और योग्यता सत्यापन प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी विवाद बन गया है।

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