मध्य प्रदेश

Veerangana दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में चीता प्रोजेक्ट की तैयारियां अंतिम चरण में

Kavita2
9 Jun 2026 9:49 AM IST
Veerangana दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में चीता प्रोजेक्ट की तैयारियां अंतिम चरण में
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : बारिश का मौसम आते ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों की चीतों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की तैयारियों में तेजी आ गई है। रिज़र्व में चल रहे चीता प्रोजेक्ट के तहत अधिकारियों ने तीन लेवल की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं, ताकि प्राकृतिक आवास में चीता स्थानांतरण सुरक्षित और सुचारू रूप से हो सके।

तीन स्तर की तैयारियों में मुख्य रूप से बाड़े का निर्माण, स्टाफ़ की ट्रेनिंग और गांव वालों को जागरूक करना शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि यह तैयारी केवल जानवरों की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के सहयोग और समझ को सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

रिज़र्व के फ़ील्ड डायरेक्टर रजनेश कुमार ने बताया कि बाड़े का निर्माण 439 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। इस काम का 75 प्रतिशत हिस्सा अब तक पूरा हो चुका है। बाड़ा इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि चीते के लिए प्राकृतिक वातावरण के समान परिस्थितियां बन सकें, और उनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

इसके अलावा, स्टाफ़ को भी चीतों को संभालने और सुरक्षित रूप से मॉनिटर करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। योजना के अनुसार 100 स्टाफ़ मेंबर को ट्रेनिंग दी जानी है। प्रशिक्षण के लिए एक बैच में 10 स्टाफ़ को कुनो नेशनल पार्क भेजा जाता है। अब तक कुल 50 स्टाफ़ मेंबर को प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। यह ट्रेनिंग दस दिनों की होती है, जिसमें चीतों के व्यवहार, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा प्रक्रियाओं का विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाता है।

चीता चौपाल के माध्यम से रिज़र्व के अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों को भी जागरूक किया है। गांव वालों को यह समझाना जरूरी है कि चीतों का स्थानांतरण और नई बाड़ा व्यवस्था उनके जीवन या कृषि कार्यों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों की सहभागिता और सहयोग इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए अहम है।

रजनेश कुमार ने कहा कि इन तैयारियों का उद्देश्य केवल चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बनाकर प्रोजेक्ट को दीर्घकालीन और स्थायी रूप देना भी है। उन्होंने बताया कि बारिश के शुरू होने से पहले यह पूरी तैयारी पूरी कर ली जाएगी ताकि स्थानांतरण के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न आए।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में चीतों का पुनर्वास एक संवेदनशील प्रक्रिया है। प्रत्येक कदम पर सावधानी और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए बाड़ा निर्माण, स्टाफ़ प्रशिक्षण और स्थानीय जागरूकता अभियान को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, बारिश का मौसम और स्थानांतरण की तारीख के नज़दीक आते ही रिज़र्व में चीता प्रोजेक्ट की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। बाड़े का निर्माण, स्टाफ़ ट्रेनिंग और गांव वालों की सहभागिता सुनिश्चित करके अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीतों का सुरक्षित स्थानांतरण और उनकी भलाई बिना किसी रुकावट के संभव हो। यह पहल भारत में चीतों के संरक्षण और प्राकृतिक आवास में उनके सफल पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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