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मोरार जिला अस्पताल में छह घंटे बिजली गुल, सात सर्जरी टलीं और जांच सेवाएं ठप

ग्वालियर। मोरार जिला अस्पताल में शनिवार को लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। करीब छह घंटे तक बिजली नहीं रहने के कारण अस्पताल में सात निर्धारित सर्जरी को टालना पड़ा। इसके अलावा एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाएं भी घंटों बंद रहीं। बिजली संकट का असर ब्लड बैंक, ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखने वाले वार्ड और अस्पताल की अन्य सुविधाओं पर भी पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को अस्पताल की बिजली आपूर्ति अचानक बाधित हो गई। शुरुआत में कर्मचारियों और मरीजों को उम्मीद थी कि कुछ समय में बिजली वापस आ जाएगी, लेकिन समस्या कई घंटे तक बनी रही। करीब छह घंटे तक नियमित बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने से अस्पताल की विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा।
सबसे गंभीर प्रभाव ऑपरेशन थिएटर पर पड़ा। शनिवार को अस्पताल में कई मरीजों की सर्जरी पहले से निर्धारित थी। मरीजों को आवश्यक जांच और अन्य तैयारियों के बाद ऑपरेशन के लिए रखा गया था, लेकिन बिजली संकट के कारण सात ऑपरेशन स्थगित करने पड़े। इनमें नेत्र रोग विभाग के चार और सर्जरी विभाग के तीन ऑपरेशन शामिल थे।
सर्जरी टलने से संबंधित मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीज पहले से अस्पताल पहुंच चुके थे और ऑपरेशन की तैयारी भी पूरी कर ली गई थी। लेकिन बिजली आपूर्ति की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन करना संभव नहीं हो पाया। अब इन मरीजों की सर्जरी के लिए नई तारीख तय करनी होगी।
बिजली गुल होने का असर केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल में एक्स-रे और सीटी स्कैन जांच भी कई घंटे बंद रही। इन मशीनों के संचालन के लिए लगातार बिजली आपूर्ति जरूरी होती है। बिजली नहीं होने के कारण जांच कराने पहुंचे मरीजों को इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीजों को जांच के लिए बाद में आने को कहा गया, जबकि कई लोग बिजली आने की उम्मीद में अस्पताल में ही रुके रहे।
जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे मरीज होते हैं, जिनके उपचार का अगला फैसला एक्स-रे, सीटी स्कैन या अन्य जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में जांच सेवाओं के कई घंटे बंद रहने से इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
ब्लड बैंक की व्यवस्था पर भी बिजली संकट का असर पड़ा। रक्त और उसके विभिन्न घटकों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए जरूरी उपकरणों को चालू रखने की चुनौती का सामना करना पड़ा।
ऑपरेशन के बाद वाले वार्ड में भर्ती मरीजों को भी परेशानी हुई। ऐसे मरीजों की नियमित निगरानी जरूरी होती है और कई चिकित्सकीय उपकरण बिजली पर निर्भर रहते हैं। अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं को जारी रखने के लिए अस्थायी जनरेटर की व्यवस्था की, लेकिन पूरे अस्पताल की जरूरतों को एक साथ पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहा।
बिजली नहीं होने से वार्डों में गर्मी भी बढ़ गई। पंखे और अन्य बिजली उपकरण बंद होने के कारण मरीजों और उनके साथ मौजूद परिजनों को कई घंटे तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। अस्पताल में पहले से इलाज करा रहे मरीजों के लिए यह स्थिति ज्यादा कठिन रही।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से वैकल्पिक जनरेटर की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया। प्राथमिकता उन विभागों और सुविधाओं को बिजली देने की रही, जहां लगातार विद्युत आपूर्ति सबसे जरूरी थी। हालांकि अस्थायी व्यवस्था के बावजूद एक्स-रे, सीटी स्कैन और ऑपरेशन थिएटर जैसी सभी सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित नहीं किया जा सका।
अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण संस्था में लंबे समय तक बिजली बाधित रहना कई सवाल खड़े करता है। अस्पतालों में सामान्य बिजली आपूर्ति के साथ पर्याप्त क्षमता वाले बैकअप सिस्टम की जरूरत होती है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक, जांच मशीनें और अन्य जरूरी सुविधाएं बिना बाधा चलती रहें।
विशेष रूप से ऑपरेशन थिएटर में बिजली आपूर्ति में व्यवधान मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है। किसी सर्जरी के दौरान अचानक बिजली जाने से गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से अस्पतालों में मजबूत जनरेटर और अन्य पावर बैकअप सिस्टम को बेहद जरूरी माना जाता है।
शनिवार की घटना के बाद अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जनरेटर या अन्य बैकअप व्यवस्था पूरे अस्पताल की जरूरी सेवाओं को लंबे समय तक संचालित करने में सक्षम नहीं है तो भविष्य में भी ऐसी स्थिति पैदा होने पर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अस्पताल में आए मरीजों और परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी जांच में हुई देरी के कारण हुई। दूर-दराज से आए कई लोग निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन मशीनें बंद होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा। मरीजों के परिजनों को यह चिंता भी रही कि जांच में देरी से इलाज प्रभावित हो सकता है।
नेत्र रोग विभाग में चार ऑपरेशन स्थगित होने से उन मरीजों को भी निराशा हुई, जो निर्धारित तारीख पर सर्जरी के लिए पहुंचे थे। इसी तरह सर्जरी विभाग के तीन मरीजों के ऑपरेशन भी नहीं हो सके। अस्पताल प्रबंधन को अब इन सभी मरीजों के लिए दोबारा कार्यक्रम तैयार करना होगा।
घटना ने सरकारी अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति और मजबूत बैकअप सिस्टम की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं में बिजली केवल सामान्य सुविधा नहीं, बल्कि कई मामलों में जीवनरक्षक व्यवस्था का हिस्सा है। ऑपरेशन थिएटर से लेकर ब्लड बैंक और डायग्नोस्टिक मशीनों तक अधिकांश आधुनिक चिकित्सा सेवाएं बिजली पर निर्भर हैं।
करीब छह घंटे बाद बिजली व्यवस्था सामान्य होने पर अस्पताल की सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया गया। हालांकि इस दौरान सात सर्जरी टल चुकी थीं और बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए इंतजार कर चुके थे।
अब अस्पताल प्रशासन के सामने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बिजली बैकअप व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती है। शनिवार की घटना ने साफ किया कि लंबे समय तक बिजली बाधित होने की स्थिति में केवल अस्थायी जनरेटर पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मरीजों की सुरक्षा और निर्बाध इलाज के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे बिजली संकट के दौरान भी ऑपरेशन, जांच, ब्लड बैंक और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं लगातार चलती रहें।





