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भोपाल। मध्य प्रदेश में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने के राज्य कैबिनेट के फैसले के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को लेकर BJP सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे 'नफरत की राजनीति' करार देते हुए सरकार को काम के आधार पर अपनी उपलब्धियां साबित करने की चुनौती दी। पटवारी ने साथ ही चेतावनी दी कि इस तरह के फैसलों के नतीजे बहुत अच्छे नहीं होंगे।
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव को लेकर फैसला किया। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय की स्थापना कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी, अब उसका नाम बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार विकास और काम पर ध्यान देने के बजाय नाम बदलने की राजनीति कर रही है।
कैबिनेट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पटवारी ने कहा, “यूनिवर्सिटी कांग्रेस की सरकार में बनी थी। आज हमारी सरकार का नाम बदलना चाहती है। उनको नाम से नफरत है। नाम से नफरत कितनी भी हो, काम तो करके बताओ।”
पटवारी ने सरकार के फैसले को सीधे राजनीतिक विचारधारा से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि BJP को कांग्रेस नेताओं से जुड़े नामों से परेशानी है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी संस्थान का नाम बदल देने से छात्रों और प्रदेश को क्या फायदा होगा। उनका कहना था कि सरकार को नाम बदलने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार और विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं को बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि नाम बदलने की राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती और इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर जोर-शोर से उठाएगी। हालांकि पार्टी आगे इस फैसले के खिलाफ किस तरह का कदम उठाएगी, इसे लेकर तत्काल कोई विस्तृत रणनीति सामने नहीं आई है।
RGPV मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का प्रमुख विश्वविद्यालय है। प्रदेश के बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षण संस्थान इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव का फैसला केवल प्रशासनिक विषय तक सीमित नहीं रहा और अब यह राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है।
कांग्रेस का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश में आधुनिक तकनीक और संचार व्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी कारण उनके नाम पर स्थापित तकनीकी विश्वविद्यालय से उनका नाम हटाया जाना उचित नहीं है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि BJP सरकार पूर्व कांग्रेस नेताओं से जुड़े संस्थानों के नाम बदलकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
वहीं इस विवाद के केंद्र में अब यह सवाल भी है कि विश्वविद्यालय का नया नाम क्या होगा और नाम बदलने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। कैबिनेट स्तर पर फैसला होने के बाद इसके क्रियान्वयन से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी। इस बीच विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को आसानी से शांत नहीं होने देगा।
जीतू पटवारी के बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नाम बदलने को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस इस फैसले को वैचारिक और राजनीतिक द्वेष से जोड़ रही है। पटवारी ने अपने बयान में सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता के बीच सरकार का मूल्यांकन नाम बदलने से नहीं बल्कि उसके काम से होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने BJP सरकार से विकास के मुद्दे पर जवाब मांगते हुए कहा कि यदि सरकार को किसी नाम से राजनीतिक असहमति है तो भी उसे अपने काम के जरिए जनता के सामने उदाहरण पेश करना चाहिए। उनके मुताबिक संस्थानों का नाम बदलने से उनकी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो पूर्व प्रधानमंत्रियों और नेताओं के नाम पर स्थापित संस्थानों, योजनाओं और स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा पहले भी देश के अलग-अलग राज्यों में विवाद का कारण बनता रहा है। ऐसे मामलों में सत्ता पक्ष अक्सर ऐतिहासिक या स्थानीय पहचान को आधार बनाकर अपने फैसलों का बचाव करता है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक विरासत मिटाने की कोशिश के तौर पर पेश करता है।
मध्य प्रदेश में भी RGPV का मामला इसी तरह की राजनीतिक बहस में बदलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस की ओर से जीतू पटवारी ने जिस आक्रामक तरीके से प्रतिक्रिया दी है, उससे संकेत मिलता है कि पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और मजबूती से उठा सकती है।
अब सभी की नजर BJP सरकार की प्रतिक्रिया और विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर रहेगी। कांग्रेस जहां इसे 'नफरत की राजनीति' बता रही है, वहीं सरकार को इस फैसले के पीछे के कारणों को लेकर विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल RGPV के नाम से 'राजीव गांधी' हटाने के फैसले ने मध्य प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है।





