मध्य प्रदेश

पद्मश्री सम्मानित पत्रकार और हिंदी लेखक कैलाश चंद्र पंत का निधन, साहित्य जगत में शोक

Kavita2
1 Aug 2026 12:05 PM IST
पद्मश्री सम्मानित पत्रकार और हिंदी लेखक कैलाश चंद्र पंत का निधन, साहित्य जगत में शोक
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भोपाल। प्रसिद्ध पत्रकार, हिंदी लेखक और साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पंत के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है।

कैलाश चंद्र पंत लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शुक्रवार को अचानक हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्यकारों, पत्रकारों और उनके प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया।

पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत हिंदी भवन के पूर्व निदेशक भी रहे थे। उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता के विकास के लिए लंबे समय तक काम किया। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, साहित्यिक चिंतन और मानवीय संवेदनाओं की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी।

उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। परिवार, साहित्यिक जगत के लोगों और शुभचिंतकों की मौजूदगी में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

कैलाश चंद्र पंत ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने लेखन और विचारों के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता को समृद्ध करने में योगदान दिया। उनकी भाषा शैली सरल, प्रभावशाली और विचार प्रधान मानी जाती थी।

साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की, जिनमें ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर पार’, ‘शब्द का विचार पथ’ और ‘शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा’ जैसी कृतियां शामिल हैं। इन रचनाओं के माध्यम से उन्होंने समाज, साहित्य और व्यक्तित्वों के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा।

‘शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा’ के जरिए उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार शैलेश मटियानी के साहित्यिक जीवन और रचनात्मक यात्रा को समझने का प्रयास किया। वहीं, उनकी अन्य कृतियों में सामाजिक और वैचारिक विषयों पर गहन चिंतन देखने को मिलता है।

कैलाश चंद्र पंत का साहित्यिक सफर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने हिंदी साहित्य को केवल लेखन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संस्थागत स्तर पर भी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभाई।

हिंदी भवन के निदेशक के रूप में उन्होंने साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और लेखकों को मंच उपलब्ध कराने के लिए कार्य किया। उनके नेतृत्व में हिंदी से जुड़े कई कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की गईं।

उनके निधन पर साहित्य और पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने कहा कि कैलाश चंद्र पंत का जाना हिंदी जगत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने अपनी रचनाओं और कार्यों के माध्यम से हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कैलाश चंद्र पंत को उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके लंबे साहित्यिक सफर और हिंदी के प्रति उनकी सेवाओं की पहचान था।

उनके लेखन में समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संबंधों और साहित्यिक मूल्यों को प्रमुख स्थान मिला। उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से पाठकों को सोचने और समाज को समझने की दृष्टि दी।

वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों का कहना है कि कैलाश चंद्र पंत की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उनकी पुस्तकों और विचारों के माध्यम से हिंदी साहित्य में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

कैलाश चंद्र पंत का जीवन हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने पत्रकारिता, लेखन और साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से जो योगदान दिया, वह लंबे समय तक हिंदी जगत में स्मरण किया जाएगा।

उनके निधन से हिंदी साहित्य ने एक अनुभवी लेखक और चिंतक को खो दिया है। साहित्य प्रेमियों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।

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