मध्य प्रदेश

ऑपरेशन हमदर्द: 1,755 बेसहारा लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

Kavita2
27 July 2026 1:27 PM IST
ऑपरेशन हमदर्द: 1,755 बेसहारा लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
x

मध्य प्रदेश : बेसहारा, बेघर और परिवार से बिछड़े लोगों की मदद के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हमदर्द’ अभियान के तहत सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक 1,755 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और उनके आसपास रहने वाले बेसहारा लोगों की पहचान कर उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराना है।

GRP अधिकारियों ने रविवार को बताया कि अभियान के दौरान करीब 50 लोगों को उनके परिवारों से दोबारा मिलाया गया है। इसके अलावा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 30 लोगों को सुरक्षित आश्रय के लिए शेल्टर होम भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि अभियान के माध्यम से ऐसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसी कारणवश अपने परिवार से दूर हो गए हैं या जिनके पास रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं है।

अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों, प्लेटफॉर्म और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। उनकी व्यक्तिगत जानकारी जुटाकर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनके परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा सके और उन्हें पुनर्वास में मदद मिल सके।

इसी अभियान के तहत रविवार को एक लापता महिला को उसके परिवार से मिलाया गया। दिल्ली की रहने वाली यह महिला किसी कारणवश अपने परिवार से बिछड़ गई थी। GRP की मदद से उसके परिवार से संपर्क किया गया, जिसके बाद परिजन गुना पहुंचे और महिला को अपने साथ वापस ले गए।

एक अन्य मामले में मुरैना रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान GRP टीम को राजस्थान के धौलपुर जिले के तिघरा गांव की 11 वर्षीय बच्ची मिली। बच्ची अपने परिवार से अलग हो गई थी। पुलिस ने तुरंत उसके परिवार से संपर्क किया और बच्ची की जानकारी दी। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) को सौंप दिया गया, ताकि उसकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

GRP के अतिरिक्त महानिदेशक (रेल) राजा बाबू सिंह ने बताया कि ‘ऑपरेशन हमदर्द’ एक महीने तक चलने वाला अभियान है, जिसकी शुरुआत 1 जुलाई को की गई थी और यह 31 जुलाई तक जारी रहेगा। अभियान के दौरान रेलवे परिसरों में घूमने वाले या लंबे समय से प्लेटफॉर्म और आसपास के इलाकों में रहने वाले बेसहारा लोगों की पहचान की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई बार रेलवे स्टेशन ऐसे लोगों के लिए अस्थायी ठिकाना बन जाते हैं, जो परिवार से अलग हो जाते हैं या किसी मजबूरी के कारण घर छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें सहायता पहुंचाना अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

अभियान के तहत अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में लोगों का डेटा तैयार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इंदौर में सबसे अधिक 587 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया गया है, जबकि जबलपुर में 546 लोगों की जानकारी दर्ज की गई है। अन्य रेलवे क्षेत्रों में भी अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने से पुलिस को ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके परिवारों तक पहुंचने में आसानी हो रही है। पहले कई बार पहचान नहीं होने के कारण बेसहारा लोगों को लंबे समय तक मदद नहीं मिल पाती थी। अब डिजिटल माध्यम से उनकी जानकारी सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उसका उपयोग करने में सहायता मिलेगी।

GRP अधिकारियों का कहना है कि अभियान केवल पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिन लोगों को परिवार तक वापस भेजना संभव नहीं है, उनके लिए शेल्टर होम और अन्य सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जा रही है।

रेलवे परिसर में रहने वाले बेसहारा बच्चों को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे बच्चों को बाल कल्याण समितियों के माध्यम से संरक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

‘ऑपरेशन हमदर्द’ के जरिए GRP का प्रयास है कि रेलवे परिसरों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को सिर्फ हटाया न जाए, बल्कि उनकी समस्याओं को समझकर समाधान उपलब्ध कराया जाए। इस अभियान से अब तक कई लोगों को अपने परिवारों तक पहुंचने में मदद मिली है।

अधिकारियों का कहना है कि अभियान की अवधि पूरी होने तक अधिक से अधिक लोगों की पहचान करने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल रिकॉर्ड और समन्वित प्रयासों के माध्यम से बेसहारा लोगों के पुनर्वास की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

Next Story