मध्य प्रदेश

शनिश्चरी अमावस्या पर क्षिप्रा में नर्मदा के पानी से होगा स्नान

Kavita2
10 Oct 2026 10:20 AM IST
शनिश्चरी अमावस्या पर क्षिप्रा में नर्मदा के पानी से होगा स्नान
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उज्जैन। शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर 10 अक्टूबर को पवित्र स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन क्षिप्रा नदी में नर्मदा का पानी पहुंचा रहा है। इसके लिए पाइपलाइन के माध्यम से पानी त्रिवेणी तक लाया जा रहा है और गौ घाट तक जमा किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था शुरू होने से पहले इस पानी को त्रिवेणी, राम घाट और दूसरे घाटों की ओर छोड़ा जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान के लिए पानी उपलब्ध कराना है। हालांकि, मानसून की विदाई के बमुश्किल एक सप्ताह बाद ही क्षिप्रा नदी में धार्मिक स्नान के लिए नर्मदा के पानी पर निर्भरता का मुद्दा फिर सामने आया है। यह स्थिति नदी में पर्याप्त जल उपलब्धता और स्थायी समाधान को लेकर सवाल खड़े करती है।

त्रिवेणी से गौ घाट तक पहुंचाया जा रहा नर्मदा का पानी

श्रद्धालुओं के स्नान के लिए प्रशासन नर्मदा का पानी पाइपलाइन के माध्यम से त्रिवेणी तक पहुंचा रहा है। इसके बाद पानी को गौ घाट तक जमा किया जा रहा है। स्नान की व्यवस्था शुरू होने से पहले इसे त्रिवेणी, राम घाट और अन्य घाटों की ओर छोड़ा जाएगा।

यह व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि पर्व पर बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को स्नान के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। उज्जैन में अमावस्या के अवसर पर पवित्र स्नान और पितरों के निमित्त धार्मिक कर्मकांड करने की परंपरा है। ऐसे में घाटों पर पानी की उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

पाइपलाइन के जरिए पानी लाने और अलग-अलग घाटों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन स्नान व्यवस्था को सुचारु रखने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, अलग-अलग घाटों पर पानी की उपलब्धता कितनी रहेगी और कितने समय तक यह व्यवस्था जारी रहेगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

शनिश्चरी और सर्व पितृ अमावस्या का विशेष संयोग

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या का संयोग है। सर्व पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और दान का विशेष महत्व है। उज्जैन में भी इस अवसर पर श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के घाटों पर पहुंचते हैं। वे स्नान के बाद अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

इस बार शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है। इस संयोग के चलते घाटों पर स्नान और पूजा-पाठ की व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

बारिश के बाद भी क्षिप्रा में बाहरी पानी पर निर्भरता

मानसून की विदाई के लगभग एक सप्ताह बाद ही क्षिप्रा नदी में धार्मिक स्नान के लिए नर्मदा का पानी पहुंचाने की जरूरत सामने आई है। इससे नदी में पर्याप्त पानी बनाए रखने और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

क्षिप्रा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राम घाट सहित इसके विभिन्न घाटों पर पर्वों और विशेष धार्मिक अवसरों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में नदी में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहना जरूरी है।

लेकिन धार्मिक स्नान के लिए नर्मदा के पानी की व्यवस्था करना यह दर्शाता है कि संबंधित अवसरों पर नदी में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजामों की आवश्यकता पड़ रही है। मानसून के तुरंत बाद ऐसी स्थिति सामने आने से क्षिप्रा के जलस्तर और प्रवाह को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।

स्थायी समाधान की जरूरत पर फिर उठे सवाल

हर बड़े धार्मिक आयोजन से पहले नदी में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कार्य है। हालांकि, बार-बार किसी दूसरी नदी से पानी लाने की जरूरत पड़ने पर क्षिप्रा में साल भर पर्याप्त जल उपलब्ध रखने के स्थायी उपायों पर भी विचार करने की आवश्यकता सामने आती है।

नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए वर्षा जल, स्थानीय जल स्रोतों, नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जल प्रबंधन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ ही नदी में प्रदूषण रोकना और जल संरक्षण से जुड़े उपायों को प्रभावी बनाना भी आवश्यक है।

हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में नर्मदा का पानी पाइपलाइन से त्रिवेणी तक लाकर गौ घाट तक जमा किया जा रहा है। इसके बाद श्रद्धालुओं के स्नान के लिए इसे प्रमुख घाटों की ओर छोड़ा जाएगा। यह व्यवस्था फिलहाल धार्मिक आयोजन के दौरान पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

श्रद्धालुओं के लिए की गई स्नान व्यवस्था

शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन घाटों पर पानी उपलब्ध कराने में जुटा है। त्रिवेणी, राम घाट और अन्य घाटों पर स्नान शुरू होने से पहले पानी छोड़े जाने की योजना है।

इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्नान व्यवस्था का सुचारु संचालन महत्वपूर्ण है। प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध हो और घाटों पर व्यवस्था बनी रहे।

कुल मिलाकर, उज्जैन में 10 अक्टूबर की अमावस्या पर स्नान के लिए नर्मदा का पानी क्षिप्रा में पहुंचाया जा रहा है। पाइपलाइन के जरिए त्रिवेणी तक पानी लाने और गौ घाट तक जमा करने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, मानसून की विदाई के कुछ ही दिनों बाद सामने आई यह जरूरत क्षिप्रा में पर्याप्त पानी बनाए रखने के स्थायी समाधान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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