मध्य प्रदेश

MP के 1900 स्कूलों में शिक्षक नहीं, CAG रिपोर्ट पर HC सख्त

Saba Naaz
21 July 2026 5:55 PM IST
MP के 1900 स्कूलों में शिक्षक नहीं, CAG रिपोर्ट पर HC सख्त
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मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश के करीब 1900 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं होने के आरोपों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार और संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला एक याचिका के आधार पर सामने आया है, जिसे वकील सौरभ त्रिपाठी ने दायर किया है। याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में वर्ष 2018 से मार्च 2023 के बीच मध्य प्रदेश के 66,814 सरकारी स्कूलों का ऑडिट किया गया था। इस जांच में बड़ी संख्या में स्कूलों में शिक्षकों की कमी सामने आई थी।

याचिका के अनुसार, CAG की रिपोर्ट में पाया गया कि राज्य के 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इनमें 1,379 स्कूल ऐसे भी शामिल हैं जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसे बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार इस मामले में चार सप्ताह के अंदर अपना जवाब दाखिल करे।

याचिका में शिक्षकों की तैनाती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में शिक्षकों का वितरण समान रूप से नहीं किया गया है। कुछ ऐसे स्कूलों में भी शिक्षक तैनात हैं जहां छात्र संख्या बेहद कम या शून्य है, जबकि कई स्कूल बिना शिक्षकों के संचालित हो रहे हैं।

याचिका में दावा किया गया कि करीब 435 ऐसे स्कूल हैं जहां कोई छात्र नहीं है, फिर भी वहां शिक्षक नियुक्त हैं। वहीं दूसरी ओर, 128 शिक्षकों को ऐसे 320 स्कूलों में भेजा गया जहां शिक्षण के लिए स्वीकृत पद ही उपलब्ध नहीं थे। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को शिक्षा विभाग की लापरवाही बताया है।

याचिका में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अन्य सवाल भी उठाए गए हैं। इसमें कहा गया कि 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में भी गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2018-19 में जहां दसवीं कक्षा का पास प्रतिशत करीब 67 प्रतिशत था, वहीं 2021-22 में यह घटकर लगभग 38 प्रतिशत रह गया।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कई जिलों में शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। नियमों के अनुसार अधिकारियों को समय-समय पर स्कूलों की स्थिति की समीक्षा करनी होती है, लेकिन कई स्थानों पर इसमें लापरवाही बरती गई।

इसके अलावा याचिका में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें दावा किया गया कि जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और DIET कार्यालयों से कई अधिकारियों को दूसरे विभागों में भेजा गया, लेकिन उनका वेतन अब भी स्कूल शिक्षा विभाग से ही जारी रहा। इससे विभाग पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। साथ ही शिक्षकों की तैनाती व्यवस्था की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग भी की गई है।

हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि बिना शिक्षकों के चल रहे स्कूलों में पढ़ाई कैसे संचालित हो रही है और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

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