मध्य प्रदेश

चार साल से पंचायत बैठक नहीं, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

Kavita2
9 Aug 2026 11:52 AM IST
चार साल से पंचायत बैठक नहीं, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
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सिरोंज : पराध ग्राम पंचायत में पिछले चार साल से अधिक समय से पंचायत की बैठक नहीं बुलाए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों के एक समूह ने प्रशासन से शिकायत की है। ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नायब तहसीलदार दोजी राम अहिरवार को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में लंबे समय से नियमित बैठकों का आयोजन नहीं किया गया। पंचायत की बैठकें नहीं होने के कारण गांव के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ग्रामीणों की भागीदारी और चर्चा का अवसर भी नहीं मिला। उनका आरोप है कि पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता का अभाव रहा और कई फैसले ग्रामीणों की जानकारी के बिना लिए गए।

विकास कार्यों में गड़बड़ी का आरोप

ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन में पंचायत क्षेत्र में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के लिए सरकारी स्तर पर राशि और योजनाएं उपलब्ध होने के बावजूद कई काम या तो सही तरीके से नहीं कराए गए या फिर उनका लाभ ग्रामीणों तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पंचायत में हुए विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की गई राशि और काम की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत के कामकाज में नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि पंचायत के कामकाज और विकास योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए तो कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की शिकायत

ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंचने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गांव में ऐसे कई परिवार हैं जो सरकारी योजनाओं के तहत सहायता पाने के पात्र हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।

ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर लोगों को योजनाओं की जानकारी देने और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद कई लोगों को कथित तौर पर योजनाओं से वंचित रहना पड़ा।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत क्षेत्र में लागू की गई विभिन्न सरकारी योजनाओं की सूची और उनके लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि योजनाओं के लिए जारी सरकारी धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं।

सरपंच के भाई पर पंचायत चलाने का आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वास्तविक रूप से सरपंच का भाई पंचायत के कामकाज को संभालता था। ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत के कई कार्यों और फैसलों में उसकी कथित तौर पर सक्रिय भूमिका रहती थी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से इस आरोप की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित होती हैं और पंचायत का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पंचायत पदाधिकारियों या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार दोजी राम अहिरवार को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में जांच की मांग की। ग्रामीणों ने पंचायत के पिछले वर्षों के कामकाज, विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और वित्तीय लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग रखी है।

उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि पंचायत में नियमित बैठकें सुनिश्चित की जाएं और ग्रामीणों को पंचायत के कामकाज की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी से गांव का विकास करना है। यदि बैठकें नियमित रूप से नहीं होंगी तो ग्रामीणों की समस्याएं और सुझाव पंचायत तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाएंगे।

जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब प्रशासन के सामने आरोपों की जांच करने की चुनौती है। मामले में पंचायत से जुड़े रिकॉर्ड, बैठकों के रजिस्टर, विकास कार्यों के दस्तावेज, भुगतान संबंधी विवरण और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की जानकारी की जांच की जा सकती है।

यदि जांच में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो प्रशासन तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकेगा।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच करेगा। उनका कहना है कि पंचायत में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ गांव के लोगों तक पहुंच सके।

फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आ गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कब शुरू होती है और पंचायत के कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

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