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मध्य प्रदेश
कांग्रेस छोड़ BJP में आईं निर्मला सप्रे, अब विधायकी पर लटकी तलवार
Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 12:56 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे चर्चा का केंद्र बन गई हैं। कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने वाली निर्मला सप्रे बुधवार, 28 अक्टूबर को अचानक मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचीं। उन्होंने विधानसभा परिसर में आयोजित नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। खास बात यह है कि सप्रे की विधानसभा सदस्यता को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। इस बीच विधानसभा में उनकी मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, निर्मला सप्रे प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुरुआती सत्र में शामिल होने के बाद वहां से चली गईं।
लंबे समय बाद विधानसभा पहुंचीं निर्मला सप्रे
बीना विधायक निर्मला सप्रे लंबे समय से विधानसभा की कार्यवाही से दूर रही हैं। वर्ष 2024 में कांग्रेस से दूरी बनाकर भाजपा के पक्ष में जाने के बाद से उनकी राजनीतिक स्थिति लगातार चर्चा में रही है।बुधवार को विधानसभा में आयोजित डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में शुरू हुए इस कार्यक्रम में विधायकों को डिजिटल तकनीक के माध्यम से सदन की कार्यवाही संचालित करने का प्रशिक्षण दिया गया।
बताया गया है कि निर्मला सप्रे प्रशिक्षण के शुरुआती हिस्से में मौजूद रहीं, लेकिन इसके बाद कार्यक्रम से निकल गईं। उनकी इस संक्षिप्त मौजूदगी के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हालांकि, प्रशिक्षण में हिस्सा लेने को उनकी विधानसभा सदस्यता संबंधी विवाद के किसी संभावित फैसले से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है।
कांग्रेस ने सदस्यता समाप्त करने की उठाई थी मांग
निर्मला सप्रे वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई थीं। इसके बाद वर्ष 2024 में उनके भाजपा के साथ जाने की खबरों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद निर्मला सप्रे ने भाजपा का समर्थन किया। इसी आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई गई।मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था।सप्रे की राजनीतिक स्थिति को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। वहीं, सप्रे की ओर से कानूनी प्रक्रिया के दौरान स्वयं को कांग्रेस से संबंधित बताए जाने की खबरें भी प्रकाशित हुई थीं।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है सदस्यता विवाद
निर्मला सप्रे का मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर न्यायालय में भी याचिका दायर की गई थी।नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दल-बदल संबंधी आवेदन पर निर्णय नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था।हालांकि, जून 2026 में हाईकोर्ट ने उमंग सिंघार की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद निर्मला सप्रे की राजनीतिक स्थिति और दल-बदल संबंधी विवाद सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि न्यायालय में किसी याचिका का खारिज होना और दल-बदल के आधार पर विधानसभा सदस्यता समाप्त होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। सप्रे की सदस्यता समाप्त किए जाने का कोई नया आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा को पेपरलेस बनाने की तैयारी
एक तरफ निर्मला सप्रे की उपस्थिति चर्चा में रही, तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।विधानसभा में 28 अक्टूबर से तीन दिवसीय NeVA प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य विधायकों और संबंधित कर्मचारियों को आधुनिक डिजिटल कार्यप्रणाली से परिचित कराना है।विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार दोपहर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम 30 अक्टूबर तक चलेगा।इसके लिए विधायकों को पांच बैचों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक बैच में लगभग 50 विधायकों को प्रशिक्षण देने की योजना है।शुरुआती प्रशिक्षण सत्र में लगभग 38 विधायक शामिल हुए। कार्यक्रम में विधायक के साथ काम करने वाले विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी और निजी सहायकों को भी डिजिटल प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है।
NeVA से क्या बदल जाएगा विधानसभा का कामकाज?
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन केंद्र सरकार की एक डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य देश की विधानसभाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक और कागजरहित बनाना है।इस प्रणाली के लागू होने के बाद विधायक सदन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य ऑनलाइन कर सकेंगे।विधानसभा में प्रश्न लगाने, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव देने, स्थगन प्रस्ताव की सूचना भेजने, संकल्प प्रस्तुत करने और याचिका संबंधी कार्यों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकेगा।इसके अलावा विधानसभा की कार्यसूची, विधेयक, प्रश्नों के उत्तर और सदन की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है।इससे विधायकों को दस्तावेजों के लिए कागजी फाइलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही विधानसभा सचिवालय को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।
विधानसभा के पुराने रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय अब पुराने और वर्तमान विधायी रिकॉर्ड को NeVA प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारियों में जुटा है।विधानसभा में पहले से मौजूद ऑनलाइन प्रश्न और ध्यानाकर्षण संबंधी व्यवस्था को भी नए प्लेटफॉर्म से एकीकृत किया जाएगा।इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विधायकों को पिछले वर्षों के प्रश्न, उत्तर, सदन की कार्यवाही और अन्य दस्तावेज डिजिटल माध्यम से मिल सकेंगे।अधिकारियों की कोशिश है कि आगामी विधानसभा सत्र से पहले अधिक से अधिक रिकॉर्ड इस प्रणाली पर उपलब्ध करा दिए जाएं।
यूट्यूब पर लाइव दिखाई जा सकती है प्रश्नकाल की कार्यवाही
विधानसभा को डिजिटल बनाने की योजना के तहत एक और महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित है। विधानसभा सचिवालय प्रश्नकाल की कार्यवाही को यूट्यूब पर लाइव प्रसारित करने की तैयारी कर रहा है।यदि सभी तकनीकी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं, तो दिसंबर में संभावित शीतकालीन सत्र से इस सुविधा की शुरुआत हो सकती है।यदि शीतकालीन सत्र तक व्यवस्था तैयार नहीं हो पाती है, तो इसे अगले बजट सत्र से लागू करने पर विचार किया जाएगा।इस पहल के लागू होने से आम नागरिक घर बैठे विधानसभा में उठाए जाने वाले सवाल और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब देख सकेंगे। हालांकि, लाइव प्रसारण शुरू करने की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने तकनीक पर दिया जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज में तकनीक के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से जनता को जनप्रतिनिधियों के कार्यों की जानकारी अधिक आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैडिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ाने, समय की बचत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद हैविधानसभा सचिवालय की ओर से विधायकों के प्रशिक्षण के बाद मंत्रियों के कार्यालयों से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी अलग प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना है।
निर्मला सप्रे की मौजूदगी से फिर गरमाई सियासत
मध्य प्रदेश विधानसभा में एक ओर डिजिटल बदलाव की तैयारियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर निर्मला सप्रे की उपस्थिति ने एक पुराने राजनीतिक विवाद को फिर चर्चा में ला दिया हैकांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गईं सप्रे के भाजपा के साथ जाने और उनकी सदस्यता को लेकर उठे सवाल अब भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं।ऐसे समय में लंबे अंतराल के बाद विधानसभा परिसर में उनकी मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।हालांकि, बुधवार को उनका विधानसभा पहुंचना NeVA के प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित था। इससे उनकी सदस्यता संबंधी मामले में किसी नए निर्णय की पुष्टि नहीं होती।
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