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इंदौर। प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सात दिवसीय आपदा तैयारी कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत करीब 900 युवा स्वयंसेवकों को ‘आपदा मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
रालामंडल स्थित SDRF ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ऐसे स्वयंसेवकों की टीम तैयार करना है, जो किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और बचाव एजेंसियों के साथ मिलकर लोगों की मदद कर सकें।
पहले चरण में 150 स्वयंसेवकों ने कराया पंजीकरण
कार्यक्रम के पहले चरण में लगभग 150 स्वयंसेवकों ने अपना पंजीकरण कराया है। इन प्रतिभागियों को आपदा के समय जीवन बचाने वाले महत्वपूर्ण कौशल सिखाए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को बताया जा रहा है कि किसी दुर्घटना, बाढ़, आग या अन्य आपदा की स्थिति में किस तरह तत्काल प्रतिक्रिया दी जाए और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद की जाए।
अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपदा के समय प्रशासन और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे।
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर विशेष जोर
इस सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक कौशल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वयंसेवकों को प्राथमिक उपचार यानी फर्स्ट एड, CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन), खोज और बचाव अभियान, बाढ़ प्रबंधन, आग बुझाने के शुरुआती तरीकों और घायल लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक सिखाई जा रही है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि आपदा के शुरुआती समय में कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मौजूद प्रशिक्षित लोग कई जिंदगियां बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
स्थानीय संसाधनों से बचाव के तरीके सीख रहे युवा
प्रशिक्षण की खास बात यह है कि स्वयंसेवकों को सीमित संसाधनों में बचाव कार्य करने के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
उन्हें सिखाया जा रहा है कि आसपास उपलब्ध सामान्य वस्तुओं का उपयोग कर आपात स्थिति में किस तरह अस्थायी बचाव उपकरण तैयार किए जा सकते हैं।
इसके तहत प्रतिभागी केले के तनों और प्लास्टिक की बोतलों से अस्थायी राफ्ट, वहीं स्थानीय सामग्री से स्ट्रेचर बनाने जैसे तरीकों का अभ्यास कर रहे हैं।
इस तरह की तकनीकें बाढ़ या अन्य आपदाओं के समय उपयोगी साबित हो सकती हैं, जब तुरंत आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाते।
समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपदा से निपटने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी से राहत और बचाव कार्य अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
‘आपदा मित्र’ योजना का उद्देश्य भी यही है कि हर क्षेत्र में ऐसे प्रशिक्षित लोग मौजूद हों, जो संकट के समय तुरंत सक्रिय हो सकें।
ये स्वयंसेवक अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और आपदा से बचाव के उपायों की जानकारी देने का काम भी करेंगे।
SDRF की देखरेख में दिया जा रहा प्रशिक्षण
रालामंडल स्थित SDRF ट्रेनिंग सेंटर में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें स्वयंसेवकों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि वे आपदा के समय घबराए बिना काम कर सकें।
प्रशिक्षण में बचाव तकनीकों के साथ-साथ टीमवर्क, निर्णय लेने की क्षमता और आपात स्थिति में नेतृत्व करने की क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगी तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को इस अभियान से जोड़ने का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है।
प्रशिक्षित युवा अपने क्षेत्रों में आपदा के समय प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत कार्यों में सहयोग करने में सक्षम होंगे।
भविष्य में बढ़ाई जाएगी स्वयंसेवकों की संख्या
प्रशासन का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक युवाओं को इस तरह के प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। इसके जरिए जिले में एक मजबूत स्वयंसेवी नेटवर्क तैयार किया जा सकेगा।
बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, इंदौर में शुरू हुआ यह सात दिवसीय आपदा तैयारी कार्यक्रम स्थानीय समुदाय को आपात स्थितियों से निपटने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 900 युवाओं को ‘आपदा मित्र’ के रूप में तैयार करने से आपदा के समय राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।





