मध्य प्रदेश

उज्जैन में श्राद्ध और तर्पण करेंगी नाज़िया इलाही खान, गरबा पंडालों को लेकर बड़ी मांग

Kavita2
9 Oct 2026 1:59 PM IST
उज्जैन में श्राद्ध और तर्पण करेंगी नाज़िया इलाही खान, गरबा पंडालों को लेकर बड़ी मांग
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इंदौर। सुप्रीम कोर्ट की वकील और सनातन धर्म की समर्थक नाज़िया इलाही खान ने उज्जैन में तर्पण और श्राद्ध करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि वह 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर उज्जैन में अपने पूर्वजों की स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान करेंगी। इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर को वह मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का दौरा करेंगी। नाज़िया इलाही खान ने कहा कि उनके इस फैसले का उद्देश्य इंसानियत, पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को बढ़ावा देना है।

मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली नाज़िया इलाही खान गुरुवार को इंदौर पहुंचीं। यहां उन्होंने अपने आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने नवरात्रि के उत्सव और गरबा आयोजनों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने गरबा पंडालों में प्रवेश के लिए पहचान पत्र की जांच अनिवार्य करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने गरबा में शामिल होने वाले लोगों के लिए गोमूत्र पीने की शर्त लागू करने की भी बात कही।

10 अक्टूबर को उज्जैन में करेंगी तर्पण और श्राद्ध

नाज़िया इलाही खान ने बताया कि वह 10 अक्टूबर को उज्जैन पहुंचकर तर्पण और श्राद्ध की धार्मिक रस्मों में हिस्सा लेंगी। उन्होंने अपने इस निर्णय को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम बताया है।

हिंदू धार्मिक परंपराओं में तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। इन अनुष्ठानों के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों का स्मरण किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण में जल अर्पित कर पितरों को याद किया जाता है, जबकि श्राद्ध में विभिन्न परंपरागत विधियों से पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।

नाज़िया इलाही खान ने कहा कि उनका उद्देश्य इन धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से इंसानियत और पूर्वजों के प्रति आभार की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने अपने फैसले को मानवीय मूल्यों और धार्मिक आस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया।

11 अक्टूबर को धार की ऐतिहासिक भोजशाला जाएंगी

उज्जैन में धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद नाज़िया इलाही खान 11 अक्टूबर को धार की ऐतिहासिक भोजशाला का दौरा करेंगी। उन्होंने इंदौर पहुंचने के दौरान अपने इस कार्यक्रम की भी जानकारी दी।

मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला स्थल है। यह स्थान लंबे समय से अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व को लेकर चर्चा में रहा है।

हालांकि, नाज़िया इलाही खान ने भोजशाला की यात्रा के दौरान किन कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की योजना बनाई है, इसके बारे में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल उन्होंने 11 अक्टूबर को इस ऐतिहासिक स्थल पर जाने की घोषणा की है।

गरबा पंडालों में महिलाओं की सुरक्षा पर जताई चिंता

इंदौर पहुंचीं नाज़िया इलाही खान ने नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में महिलाओं की सुरक्षा को महत्व दिया जाना चाहिए।

गरबा नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाला एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा भाग लेते हैं। इन आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन महत्वपूर्ण विषय होते हैं।

नाज़िया इलाही खान ने गरबा पंडालों में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने मांग की कि कार्यक्रमों में आने वाले लोगों के पहचान पत्रों की जांच अनिवार्य की जाए।

उनका कहना है कि गरबा आयोजनों में प्रवेश के लिए पहचान की जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने जिन व्यवस्थाओं की मांग की है, उन्हें लागू करने के संबंध में आयोजकों या प्रशासन की ओर से किसी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

गरबा में प्रवेश के लिए गोमूत्र पीने की शर्त रखने की मांग

नाज़िया इलाही खान ने गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर एक और मांग रखी। उन्होंने कहा कि गरबा में हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए गोमूत्र पीना आवश्यक किया जाना चाहिए।

उनकी इस मांग का संबंध गरबा आयोजनों में प्रवेश की शर्तों से है। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत प्रस्ताव है और इसे किसी सरकारी आदेश या प्रशासनिक नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस मांग पर आयोजकों या संबंधित प्रशासन की प्रतिक्रिया की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। धार्मिक आयोजनों में प्रवेश से संबंधित किसी भी नियम को लागू करने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों, व्यक्तिगत अधिकारों और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखना जरूरी होता है।

सनातन धर्म और मानवीय मूल्यों पर दिया जोर

नाज़िया इलाही खान स्वयं को सनातन धर्म की समर्थक बताती हैं। उन्होंने उज्जैन में तर्पण और श्राद्ध करने के अपने फैसले को पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने से जोड़ा है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इंसानियत और कृतज्ञता की भावना को बढ़ावा देना है। उनके मुताबिक, पूर्वजों का स्मरण करना और उनके प्रति सम्मान प्रकट करना मानवीय मूल्यों से जुड़ा विषय है।

उनके आगामी कार्यक्रम में उज्जैन और धार की यात्राएं शामिल हैं। एक ओर वह उज्जैन में धार्मिक अनुष्ठान करेंगी, वहीं दूसरी ओर धार की ऐतिहासिक भोजशाला जाएंगी।

इंदौर में की दोनों कार्यक्रमों की घोषणा

गुरुवार को इंदौर पहुंचने के बाद नाज़िया इलाही खान ने अपने धार्मिक कार्यक्रमों और गरबा आयोजनों से संबंधित मांगों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर को उज्जैन में तर्पण और श्राद्ध की रस्में निभाएंगी और 11 अक्टूबर को भोजशाला का दौरा करेंगी।

इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता सामने रखी और गरबा पंडालों में प्रवेश के लिए पहचान पत्र की जांच तथा गोमूत्र पीने की शर्त लागू करने की मांग की।

फिलहाल उनके घोषित कार्यक्रमों और मांगों की जानकारी सामने आई है। अब उनके उज्जैन और धार दौरे के साथ-साथ गरबा आयोजनों को लेकर रखे गए प्रस्तावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

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