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मध्य प्रदेश
भोपाल में राष्ट्रीय सम्मेलन: न्याय प्रणाली में एआई के उपयोग पर बनी ठोस रणनीति
SHIDDHANT
21 April 2026 8:07 PM IST

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Bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के विशेष सम्मलेन आपराधिक न्याय प्रणाली में एआई के उपयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई और इसके शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया। भोपाल में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से 'आपराधिक न्याय प्रणाली में एआई का उपयोग' विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया।
इस आयोजन में न्यायपालिका, पुलिस, फॉरेंसिक और जेल प्रशासन के 170 से अधिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि नई तकनीक की मदद से न्याय प्रणाली को कैसे बेहतर बनाया जाए। इस सम्मेलन के उद्घाटन में न्यायमूर्ति राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी भोपाल के निदेशक अनिरुद्ध बोस, एनसीआरबी एवं बीपीआरएंडडी नई दिल्ली के महानिदेशक आलोक रंजन उपस्थित रहे। सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच प्रमुख क्षेत्रों न्यायपालिका , पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक तथा सुधारात्मक प्रशासन में एआई की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई तथा इसके संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वालों ने एल्गोरिदमिक पक्षपात, फॉल्स पॉजिटिव तथा स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता जैसी प्रमुख चुनौतियों पर भी विचार किया। भारत में विधिक एवं संस्थागत प्रतिक्रियाओं, जैसे उच्चतम न्यायालय की एआई पहलों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा जेनरेटिव एआई के उपयोग को विनियमित करने हेतु जारी दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई। सम्मेलन में एआई-जनित साक्ष्यों की स्वीकार्यता, डीपफेक से संबंधित चिंताओं तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। साथ ही, गोपनीयता, निगरानी एवं मानवाधिकारों से संबंधित नैतिक पहलुओं को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
सम्मेलन के विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एआई आपराधिक न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण 'फोर्स मल्टीप्लायर' है, परंतु इसके प्रभावी उपयोग के लिए क्षमता निर्माण, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं तथा मानव निगरानी आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विधिक वैधता सुनिश्चित की जा सके। आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक क्षेत्र में एआई के उपयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे इसके शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया।
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