मध्य प्रदेश

नमामि गंगे परियोजना में धीमी रफ्तार पर भड़के नगर आयुक्त, STP निर्माण में तेजी लाने के निर्देश

Kavita2
28 Oct 2026 10:58 AM IST
नमामि गंगे परियोजना में धीमी रफ्तार पर भड़के नगर आयुक्त, STP निर्माण में तेजी लाने के निर्देश
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में नमामि गंगे परियोजना के तहत बनाए जा रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने नाराजगी जताई है। मंगलवार को उन्होंने शहर में निर्माणाधीन एसटीपी परियोजनाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त सबसे पहले कनाड़िया में बन रहे 40 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे। यहां निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए उन्होंने काम की धीमी रफ्तार पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए श्रमिकों, मशीनरी और कार्य इकाइयों की संख्या बढ़ाई जाए। निगमायुक्त ने कहा कि सीवरेज परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से शहर की जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

कनाड़िया में 40 एमएलडी एसटीपी का निरीक्षण

नगर आयुक्त क्षितिज सिंघल ने मंगलवार को नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण की शुरुआत कनाड़िया क्षेत्र में बनाए जा रहे 40 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी से हुई।

यह संयंत्र प्रतिदिन चार करोड़ लीटर सीवेज के उपचार की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य शहर से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित करना और जल प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने निर्माण एजेंसी से परियोजना की वर्तमान स्थिति और शेष कार्यों की जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक चरण की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि निर्माण में आने वाली बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके।

निर्माण कार्य की धीमी गति पर जताई नाराजगी

कनाड़िया एसटीपी प्लांट के निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त को निर्माण कार्य की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिली।

इस पर उन्होंने संबंधित निर्माण एजेंसी के अधिकारियों से नाराजगी जताई और काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त मजदूरों, तकनीकी कर्मचारियों और मशीनों की उपलब्धता आवश्यक है।

नगर आयुक्त ने एजेंसी को कार्य इकाइयों की संख्या बढ़ाने और विभिन्न निर्माण गतिविधियों को समानांतर रूप से संचालित करने के निर्देश दिए।

साथ ही परियोजना के शेष कार्यों के लिए व्यवस्थित कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करने पर जोर दिया।

मजदूरों और मशीनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश

नगर आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य में संसाधनों की कमी के कारण देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने निर्माण एजेंसी को निर्देशित किया कि कार्यस्थल पर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मजदूर लगाए जाएं और निर्माण गतिविधियों के लिए मशीनों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

इससे अलग-अलग हिस्सों में काम को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा।

उन्होंने परियोजना से जुड़े इंजीनियरों को निर्माण की प्रगति पर लगातार नजर रखने को कहा।

अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि काम की गति बढ़ाने के दौरान निर्माण की गुणवत्ता से समझौता न हो।

शहर में तीन स्थानों पर बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

इंदौर में नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत तीन प्रमुख स्थानों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विकसित किए जा रहे हैं।

इनमें कनाड़िया में 40 एमएलडी, कबीटखेड़ी में 120 एमएलडी और किला मैदान क्षेत्र में 35 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र शामिल हैं।

तीनों संयंत्रों की कुल प्रस्तावित क्षमता 195 एमएलडी है।

पूर्व में प्रकाशित परियोजना विवरणों के अनुसार, इन एसटीपी और संबंधित सीवरेज कार्यों के लिए लगभग 416 करोड़ रुपये की लागत का उल्लेख किया गया है।

इन संयंत्रों के तैयार होने से शहर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित करने की क्षमता बढ़ेगी।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से भी जुड़ी परियोजना

इंदौर में सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने की योजना आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सिंहस्थ के दौरान उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में आवाजाही होती है। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर स्वच्छता और जल प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

इंदौर में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत विकसित हो रहे एसटीपी इसी व्यापक जल प्रबंधन प्रयास का हिस्सा हैं।

परियोजना पूरी होने के बाद शहर के सीवेज उपचार ढांचे को मजबूती मिलेगी और जल स्रोतों में अनुपचारित गंदे पानी का प्रवाह कम करने में मदद मिल सकती है।

नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने पर जोर

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का मुख्य उद्देश्य घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले गंदे पानी का उपचार करना है।

शहरों में पर्याप्त सीवरेज उपचार क्षमता नहीं होने पर दूषित पानी नालों के जरिए नदियों और अन्य जल स्रोतों तक पहुंच सकता है।

इंदौर में कान्ह और सरस्वती नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से विभिन्न परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

नए एसटीपी के निर्माण से दूषित पानी के उपचार की क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब संयंत्रों के साथ संबंधित सीवर लाइन और जल निकासी नेटवर्क भी प्रभावी ढंग से संचालित होंगे।

निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

नगर आयुक्त ने परियोजना को समय पर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की नियमित जांच आवश्यक है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में विभिन्न प्रकार की मशीनें, पाइपलाइन, पंप और जल उपचार से जुड़े उपकरण लगाए जाते हैं।

इन सभी का निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार निर्माण और परीक्षण होना जरूरी है।

किसी भी स्तर पर लापरवाही होने से संयंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए परियोजना के निर्माण के दौरान तकनीकी निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहले भी परियोजनाओं की समीक्षा कर चुके हैं निगमायुक्त

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल इससे पहले भी शहर में नमामि गंगे अभियान के तहत चल रहे सीवरेज और जल प्रबंधन कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं।

मार्च 2026 में उन्होंने छोटा बांगड़दा रोड पर ट्रेंचलेस तकनीक से बिछाई जा रही सीवर लाइन का निरीक्षण किया था।

इस तकनीक में सड़क की बड़े पैमाने पर खुदाई किए बिना भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जा सकती है।

उस समय उन्होंने कबीटखेड़ी और किला मैदान एसटीपी के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की थी और निर्धारित समय में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे।

परियोजना पूरी होने से शहरवासियों को मिलेगा लाभ

नमामि गंगे परियोजना के तहत विकसित हो रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट इंदौर की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण हैं।

शहर में जनसंख्या और आवासीय क्षेत्रों के विस्तार के साथ सीवेज उपचार की मांग भी बढ़ रही है।

ऐसे में नई उपचार क्षमता विकसित होने से जल प्रदूषण नियंत्रित करने और शहरी स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

नगर आयुक्त के निरीक्षण के बाद निर्माण एजेंसियों पर काम की गति बढ़ाने का दबाव बढ़ा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां अतिरिक्त संसाधन जुटाकर परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर पाती हैं या नहीं।

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