मध्य प्रदेश

MP : साइबर ठगी के दो मामलों में डॉक्टर समेत दो लोग बने शिकार

Kavita2
17 July 2026 10:22 AM IST
MP : साइबर ठगी के दो मामलों में डॉक्टर समेत दो लोग बने शिकार
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इंदौर: शहर में साइबर अपराधियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में ठगों ने एक डॉक्टर समेत दो लोगों को अपना शिकार बनाया। एक मामले में डॉक्टर के क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल कर 37 हजार रुपये की खरीदारी कर ली गई, जबकि दूसरे मामले में फर्जी लिंक पर क्लिक करने के बाद एक व्यक्ति के खाते से करीब 98 हजार रुपये निकाल लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहला मामला विजय नगर थाना क्षेत्र का है, जहां एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए। डॉक्टर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 7 जून को उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया था। मैसेज में जानकारी दी गई थी कि उनके क्रेडिट कार्ड से 37 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया है।

मैसेज देखने के बाद डॉक्टर को शक हुआ, क्योंकि उन्होंने इस तरह की कोई खरीदारी नहीं की थी। इसके बाद उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी की और बैंक से संपर्क किया। जांच में पता चला कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर ऑनलाइन गिफ्ट वाउचर खरीदे थे।

डॉक्टर ने तुरंत इस घटना की जानकारी नेशनल साइबर हेल्पलाइन पर दी। शिकायत मिलने के बाद साइबर टीम ने मामले की जानकारी संबंधित पुलिस थाने को भेजी। इसके आधार पर विजय नगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले आरोपी अक्सर चोरी किए गए कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल कर खरीदारी करते हैं। कई बार आरोपी छोटी-छोटी रकम में ट्रांजेक्शन कर पीड़ितों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ मामलों में बड़ी रकम की खरीदारी भी कर लेते हैं।

दूसरा मामला लसूड़िया थाना क्षेत्र का सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसके पास एक लिंक भेजा गया था। किसी कारणवश उसने उस लिंक पर क्लिक कर दिया, जिसके बाद उसके खाते से करीब 98 हजार रुपये निकल गए।

पीड़ित को जब खाते से पैसे कटने का पता चला तो उसने तुरंत बैंक से संपर्क किया और पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने इस मामले में भी अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि फर्जी लिंक के माध्यम से पीड़ित की निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल की गई होगी। साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लिंक भेजते हैं, जो देखने में किसी बैंक, कंपनी या सरकारी सेवा की वेबसाइट जैसे लगते हैं। जैसे ही व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता है, उसकी जानकारी ठगों तक पहुंच सकती है।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध मैसेज या कॉल से सावधान रहें। बैंक, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य वित्तीय सेवा से जुड़ी जानकारी कभी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ठग अब फर्जी वेबसाइट, नकली लिंक, ओटीपी मांगने वाले कॉल और सोशल मीडिया संदेशों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में लोगों को ऑनलाइन लेन-देन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

पुलिस ने बताया कि दोनों मामलों में तकनीकी जांच की जा रही है। साइबर टीम बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते रकम को रोकने और आरोपियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ सके।

शहर में सामने आए इन दोनों मामलों ने एक बार फिर ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है। पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को साइबर अपराधों से बचने के उपाय बता रही है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा के लिए नागरिकों की सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है।

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