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MP : अंतिम संस्कार में लकड़ी की बजाय इस चीज का होगा प्रयोग

दमोह | मध्य प्रदेश के दमोह जिले में अब अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ी की बजाय गौकाष्ठ का उपयोग किया जाएगा। यह प्रयोग शुरू किया गया है ताकि पर्यावरण संरक्षण और गोवर्धन की दिशा में कदम उठाए जा सकें। इस योजना की शुरुआत मुक्तिधाम के सदस्यों द्वारा की गई है, जिन्होंने पहले इस प्रयोग को उज्जैन और देवास जैसे स्थानों पर देखा था।
गौकाष्ठ का महत्व और लाभ
गौकाष्ठ, जिसे गाय के गोबर से तैयार किया जाता है, प्राकृतिक रूप से अधिक पर्यावरण-friendly होता है। इसे जलाने से कम धुआं निकलता है और यह पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, गौकाष्ठ के उपयोग से गायों की पूजा और सम्मान को बढ़ावा मिलता है, जिससे धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उज्जैन और देवास में सफलता
इस पहल को सबसे पहले उज्जैन और देवास में सफलतापूर्वक लागू किया गया था। वहां के मुक्तिधाम में गौकाष्ठ के उपयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन दोनों शहरों में पर्यावरणीय दृष्टि से यह एक स्थिर और प्रदूषण रहित विकल्प के रूप में अपनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप, पर्यावरणीय संरक्षण को प्रोत्साहन मिला है और लोगों को जागरूक किया गया है।
दमोह में शुरुआत
दमोह जिले के मुक्तिधाम के सदस्य अब इस प्रयोग को अपनाने जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और समाजसेवियों का मानना है कि यह कदम पर्यावरणीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, गौकाष्ठ के उपयोग से गायों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ
स्थानीय लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं और वे इसे सकारात्मक दिशा में एक बड़ा कदम मानते हैं। वे मानते हैं कि यह न केवल पर्यावरण को बचाने के लिए अच्छा है, बल्कि यह समाज के धार्मिक दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
भविष्य की दिशा
दमोह में गौकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को और भी विस्तार दिया जाएगा। भविष्य में जिले के अन्य मुक्तिधामों में भी इस प्रयोग को लागू किया जा सकता है। यह पहल मध्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगी, और अन्य जिलों में भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।





