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भोपाल: मानसून के आगमन के साथ देश के विभिन्न टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पर्यटन गतिविधियां बंद होने के बाद अब वन विभाग ने जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेष मानसून पेट्रोलिंग अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शिकार की घटनाओं पर रोक लगाना, अवैध रूप से जंगल में प्रवेश करने वालों पर निगरानी रखना तथा वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वन अधिकारियों के अनुसार मानसून का मौसम वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बारिश के दौरान जंगलों में घास तेजी से बढ़ जाती है, जिससे दृश्यता काफी कम हो जाती है। घनी झाड़ियां और ऊंची घास का फायदा उठाकर शिकारी अक्सर जंगलों में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। इसी खतरे को देखते हुए वन विभाग ने इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर पैदल गश्त का कार्यक्रम शुरू किया है।
पर्यटकों के लिए बंद किए गए जंगल
हर वर्ष मानसून के दौरान अधिकांश टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों को कुछ महीनों के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य एक ओर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है तो दूसरी ओर वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में बिना किसी व्यवधान के रहने का अवसर देना भी होता है।
बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, कई मार्ग जलभराव या उफनते नालों के कारण बंद हो जाते हैं। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी जाती है।
शिकारी उठा सकते हैं मौसम का फायदा
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान जंगलों में निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लंबी घास, घने पेड़-पौधे और लगातार बारिश के कारण जंगल के अंदर दूर तक देख पाना मुश्किल हो जाता है।
इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर शिकारी और वन अपराधी जंगल में घुसने का प्रयास कर सकते हैं। वे वन्यजीवों का शिकार करने या जंगल से अवैध रूप से लकड़ी तथा अन्य वन उत्पाद निकालने की कोशिश करते हैं। इसलिए इस मौसम में सतर्कता और अधिक बढ़ा दी जाती है।
पैदल गश्त पर रहेगा विशेष जोर
मानसून पेट्रोलिंग अभियान के तहत वन रक्षक, बीट गार्ड, वनपाल और अन्य कर्मचारियों की विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें नियमित रूप से जंगल के अंदर पैदल भ्रमण कर संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करेंगी।
अधिकारियों के अनुसार वाहन कई स्थानों तक नहीं पहुंच सकते, इसलिए पैदल गश्त सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। गश्ती दल जंगल के रास्तों, जल स्रोतों, पशुओं के आवागमन वाले क्षेत्रों और संभावित शिकार स्थलों पर विशेष नजर रखेंगे।
हर टीम को 25 किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य
मानसून पेट्रोलिंग कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गश्ती दल को हर महीने कम से कम 25 किलोमीटर पैदल गश्त करने का लक्ष्य दिया गया है। इस दौरान टीमों को जंगल के भीतर नियमित रूप से भ्रमण करना होगा और प्रत्येक गतिविधि का रिकॉर्ड भी तैयार करना होगा।
गश्ती दल वन्यजीवों की गतिविधियों, उनके पदचिह्न, संदिग्ध लोगों की मौजूदगी, अवैध गतिविधियों तथा जंगल की स्थिति का विस्तृत विवरण तैयार करेंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
वन विभाग का कहना है कि मानसून का मौसम कई वन्यजीवों के प्रजनन और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की मानवीय दखल से बचाना आवश्यक है।
बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, गौर, सांभर, जंगली कुत्ते सहित कई वन्यजीव इस मौसम में अधिक सक्रिय रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जंगलों में लगातार निगरानी रखी जाएगी।
आधुनिक तकनीक का भी लिया जा रहा सहारा
पैदल गश्त के अलावा कई टाइगर रिजर्व में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। वन विभाग जीपीएस आधारित निगरानी, कैमरा ट्रैप, वायरलेस संचार प्रणाली और डिजिटल मॉनिटरिंग का उपयोग कर जंगलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
जहां संभव है, वहां ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों की निगरानी आसान हो सके।
स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग भी अहम
वन अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय ग्रामीणों और वन समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। आसपास के गांवों के लोगों से अपील की गई है कि यदि जंगल में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
इसके साथ ही लोगों को बिना अनुमति जंगल में प्रवेश न करने तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास से दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
अवैध गतिविधियों पर होगी सख्त कार्रवाई
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति जंगल में प्रवेश करता है या शिकार अथवा अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए गए हैं और नियमित अंतराल पर निगरानी बढ़ाई गई है।
संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून पेट्रोलिंग वन्यजीव संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है। इस दौरान की गई सतर्क निगरानी न केवल शिकार की घटनाओं को रोकने में मदद करती है, बल्कि वन्यजीवों के व्यवहार, उनके आवास और जंगल की स्थिति के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है।
वन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसून के दौरान जंगल पूरी तरह सुरक्षित रहें और वन्यजीव बिना किसी खतरे के अपने प्राकृतिक वातावरण में रह सकें। इसी उद्देश्य से इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर मानसून पेट्रोलिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।





