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MP News: अगर आप भी LPG सिलेंडर की डिलीवरी के बाद उसे सिर्फ उस जगह पर चेक करके संतुष्ट हो जाते हैं, जहां रेगुलेटर लगा होता है, तो सावधान हो जाइए। क्योंकि सिलेंडर लीकेज की संभावना सिर्फ ऊपरी हिस्से में ही नहीं बल्कि उसके निचले हिस्से (नीचे) में भी हो सकती है। दरअसल गुना जिले के डोंगर स्थित बॉटलिंग प्लांट में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। कहा जा सकता है कि IOCL के बॉटलिंग प्लांट की लापरवाही एक ग्राहक के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। पूरी घटना 17 फरवरी 2025 की है। इस दिन डोंगर बॉटलिंग प्लांट से वाहनों में सिलेंडर भरकर रोजाना की तरह गैस एजेंसियों को भेजे गए थे।
गुना जिले के बीनागंज स्थित सोडानी गैस एजेंसी पर भी सिलेंडरों से भरा एक वाहन पहुंचा। बॉटलिंग प्लांट के कर्मचारी सिलेंडर डिलीवर करने के बाद वापस लौट गए। लेकिन गैस एजेंसी पर मौजूद कर्मचारियों को कुछ शक हुआ। जांच करने पर पता चला कि एक सिलेंडर के नीचे से लीक हो रही थी। छेद इतना बड़ा था कि उसमें से निकल रही रसोई गैस की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। सूत्रों के अनुसार गैस एजेंसी संचालक ने तत्काल बॉटलिंग प्लांट के अधिकारियों से संपर्क किया तो वे भी हैरान रह गए। आनन-फानन में एजेंसी को सलाह दी गई कि लीक हो रहे सिलेंडर को थोड़ा दूर रखें, ताकि कुछ देर में गैस अपने आप बाहर आ जाए। एजेंसी संचालक ने निर्देशों का पालन किया और कुछ ही घंटों में सिलेंडर खाली हो गया।
हालांकि सवाल यह उठता है कि अगर लीक हो रहा सिलेंडर किसी ग्राहक के घर पहुंचा दिया जाता तो क्या होता? हमेशा की तरह ग्राहक सिलेंडर के मुंह को जितना हो सके चेक करता और अपने घर में उसका उपयोग शुरू कर देता। घटना सामने आने के बाद बॉटलिंग प्लांट के अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे हैं और इसे मामूली मामला मान रहे हैं। डोंगर बॉटलिंग प्लांट से जुड़ी घटना के बाद सभी गैस एजेंसी संचालक चिंतित हैं। धीरे-धीरे अन्य एजेंसी संचालकों को भी मामले की जानकारी हो रही है। लेकिन अधिकारी गलती स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि शायद बॉटलिंग प्लांट में सिलेंडर भरने के बाद उनकी जांच नहीं की जा रही है। वरना इतनी बड़ी गलती नहीं होती।
नियमों के मुताबिक, सिलेंडर भेजने से पहले उनकी जांच करना जरूरी है। अगर कोई सिलेंडर लीक हो रहा है तो उसे भेजा नहीं जा सकता। बॉटलिंग प्लांट में जरा सी लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है। इसके उदाहरण पहले भी गुजरात के वडोदरा और उत्तर प्रदेश के मथुरा में सामने आ चुके हैं। 11 नवंबर 2024 को वडोदरा के कोयली गांव में स्थित आईओसीएल बॉटलिंग प्लांट में स्टोरेज टैंक में भीषण आग लग गई थी। इस दौरान जोरदार धमाका हुआ और प्लांट से करीब 4 किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों ने झटके महसूस किए। टैंक से निकलता धुआं 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। हादसे की वजह मेंटेनेंस में लापरवाही पाई गई।
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Renuka Sahu
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