मध्य प्रदेश

MP : सिंहस्थ में खर्च कम करने की नई पहल, अधिकारी अब एक ही बस में कर रहे निरीक्षण

Kavita2
13 May 2026 2:48 PM IST
MP : सिंहस्थ में खर्च कम करने की नई पहल, अधिकारी अब एक ही बस में कर रहे निरीक्षण
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद सिंहस्थ मेले की व्यवस्थाओं में खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। इसी क्रम में सिंहस्थ मेला अधिकारी और डिविजनल कमिश्नर आशीष सिंह ने निरीक्षण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है।

नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करने के बजाय एक ही बस में बैठकर क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आ रही है, बल्कि निरीक्षण कार्य को अधिक व्यवस्थित और समन्वित तरीके से किया जा रहा है। पहले के दौर में अधिकारियों द्वारा अलग-अलग गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे संसाधनों का अधिक उपयोग होता था।

आशीष सिंह ने अपने हालिया दौरे के दौरान इसी नई व्यवस्था के तहत अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में सफर किया और सिंहस्थ से जुड़े विभिन्न कार्यों का नियमित निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मेले की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान गौ घाट से लेकर अन्य प्रमुख घाटों तक व्यवस्थाओं का विस्तार से मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग, भीड़ प्रबंधन और घाटों पर सुविधाओं की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान यह भी देखा गया कि नए घाटों पर आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनके लिए सुरक्षित व सरल मार्ग सुनिश्चित किया जा सके।

मेला प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं, ऐसे में व्यवस्थाओं की निगरानी और बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। खर्च में कटौती के साथ-साथ प्रशासन का उद्देश्य कार्यकुशलता को बढ़ाना भी है।

इस नई पहल को प्रशासनिक स्तर पर एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे सरकारी संसाधनों की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। कम वाहनों के उपयोग से ईंधन की खपत में भी कमी आएगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था आगे भी जारी रखी जाएगी और सिंहस्थ से जुड़े अन्य निरीक्षण कार्यों में भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार किया जाएगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा, बल्कि एक अनुशासित और समन्वित कार्य संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय स्तर पर इस पहल की सराहना की जा रही है और इसे एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है कि कैसे बड़े आयोजनों में भी खर्च को नियंत्रित रखते हुए प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।

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